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AIIMS निदेशक की चेतावनी: बेवजह ली एंटीबायोटिक तो भविष्य में इलाज भी बेबस होगा !

  • December 30, 2025
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डॉ. एम. श्रीनिवास बोले—आज की लापरवाही कल जानलेवा संकट में बदलेगी अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के

डॉ. एम. श्रीनिवास बोले—आज की लापरवाही कल जानलेवा संकट में बदलेगी

अरुण शर्मा रिधि दर्पण !

देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने एंटीबायोटिक दवाओं के बेतहाशा और गलत इस्तेमाल को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना एक खतरनाक आदत बन चुकी है, जो आने वाले वर्षों में गंभीर बीमारियों के इलाज को लगभग असंभव बना सकती है।


डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, आज समाज में मामूली सर्दी-जुकाम, बुखार या सामान्य संक्रमण में भी लोग खुद से एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं, जबकि इनमें से अधिकतर बीमारियां वायरल होती हैं और उनमें एंटीबायोटिक की कोई भूमिका नहीं होती। उन्होंने कहा, “यह चलन तुरंत रुकना चाहिए, वरना इसके परिणाम बेहद भयावह होंगे।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि जब देश का नेतृत्व इस विषय पर चिंता जताता है, तो यह संकेत है कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) अब केवल मेडिकल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। बार-बार और बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से बैक्टीरिया इतने ताकतवर हो जाते हैं कि दवाएं उन पर असर करना बंद कर देती हैं।
AIIMS निदेशक ने बताया कि संस्थान में एंटीबायोटिक उपयोग को लेकर सख्त, वैज्ञानिक और नियंत्रित व्यवस्था लागू है। एक विशेष समिति और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम तय मानकों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के आधार पर यह निर्णय लेती है कि किस मरीज को एंटीबायोटिक दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि AIIMS इस दिशा में देशभर के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के लिए लीडरशिप मॉडल की भूमिका निभा रहा है।
डॉ. श्रीनिवास ने यह भी स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी केवल मरीजों की नहीं, बल्कि डॉक्टरों की भी है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार बिना जरूरत साफ-सुथरी सर्जरी में भी एंटीबायोटिक दे दी जाती है, जो गलत प्रैक्टिस है और इसे रोकना जरूरी है। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि दवा को तय अवधि तक पूरा लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि अधूरा इलाज रेजिस्टेंस को और बढ़ाता है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं, जब आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों के पास भी असरदार एंटीबायोटिक नहीं होगी। तब इलाज के विकल्प बेहद सीमित रह जाएंगे।”
AIIMS निदेशक ने यह भी बताया कि एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरियल संक्रमण में ही कारगर होती है—जैसे निमोनिया, सेप्सिस, मेनिनजाइटिस, यूटीआई और टीबी। इसके विपरीत आम सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार और कई सांस संबंधी बीमारियां बैक्टीरियल नहीं होतीं, फिर भी लोग खुद से दवाएं लेना शुरू कर देते हैं, जिससे शरीर के अच्छे बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब बैक्टीरिया बार-बार एंटीबायोटिक के संपर्क में आते हैं, तो वे खुद को बचाने के लिए बदलने लगते हैं और दवा के असर को खत्म करने की क्षमता विकसित कर लेते हैं। यही खतरनाक बैक्टीरिया आगे चलकर अपनी ताकत दूसरी पीढ़ियों और अन्य बैक्टीरिया तक पहुंचा देते हैं, जिससे संक्रमण और भी जानलेवा बन जाता है।
डॉ. श्रीनिवास ने आम जनता से अपील की कि डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें और चिकित्सकों द्वारा दिए गए निर्देशों का पूरी ईमानदारी से पालन करें। उन्होंने कहा, “आज की छोटी सी लापरवाही कल एक बड़ी स्वास्थ्य आपदा का रूप ले सकती है।”

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