January 15, 2026
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AIIMS के फॉरेंसिक विभाग प्रमुख ने मृतकों के सम्मानजनक प्रबंधन पर जोर दिया, राष्ट्रीय डिज़ास्टर मॉर्चरी बनाने की मांग

  • November 29, 2025
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अरुण शर्मा रिधि दर्पण !  नई दिल्ली: AIIMS दिल्ली के फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. सुधीर गुप्ता ने मृतकों के सम्मानजनक व्यवहार पर जोर देते

अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! 

नई दिल्ली: AIIMS दिल्ली के फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. सुधीर गुप्ता ने मृतकों के सम्मानजनक व्यवहार पर जोर देते हुए कहा कि चाहे किसी व्यक्ति की मौत कैसे भी हुई हो, हर शव के साथ गरिमा से पेश आना हमारी जिम्मेदारी है।

AIIMS में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में, जिसमें देश के प्रमुख फॉरेंसिक विशेषज्ञ और इंटरनेशनल रेड क्रॉस सोसायटी के प्रमुख शामिल थे, प्रो. गुप्ता ने कहा कि मृत व्यक्ति भले कुछ न कह सके, लेकिन उनके परिजन यह महसूस करते हैं कि उनके प्रियजन के साथ कैसा व्यवहार किया गया।

उन्होंने बताया कि कई बार हादसों या विस्फोटों में शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हालत में पहुंचते हैं। “हमारा काम है कि हम उन्हें मानवीय तरीके से पुनर्निर्मित करें ताकि परिवार को अतिरिक्त दर्द न झेलना पड़े,” उन्होंने कहा।

प्रो. गुप्ता ने बताया कि AIIMS दिल्ली लंबे समय से बुरी तरह क्षतिग्रस्त शवों का पुनर्निर्माण कर रहा है, ताकि परिवार सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर सके। उन्होंने दिल्ली बम ब्लास्ट जैसे मामलों का उदाहरण दिया, जहां शरीर के अंग इधर-उधर बिखरे मिले थे।

“हमने सभी अंग इकठ्ठा किए, शरीर का पुनर्निर्माण किया और परिवार को सम्मानपूर्वक सौंपा,” उन्होंने कहा।

AIIMS में शव का पुनर्निर्माण पूरी तरह मुफ़्त किया जाता है।

उन्होंने बताया कि AIIMS में वर्चुअल ऑटोप्सी शुरू की गई है, जिसमें शरीर को काटने के बजाय उन्नत स्कैनिंग तकनीक से जांच की जाती है।

“कई परिवारों के लिए शरीर पर कट लगाना बहुत पीड़ादायक होता है। वर्चुअल ऑटोप्सी से यह दर्द कम होता है,” प्रो. गुप्ता ने कहा।

कार्यशाला में यह भी चर्चा हुई कि देश को विमान दुर्घटना, बम धमाकों या प्राकृतिक आपदाओं जैसे बड़े घटनाक्रमों में शवों के प्रबंधन के लिए तैयारी मजबूत करनी चाहिए। इंटरनेशनल रेड क्रॉस सोसायटी इस दिशा में AIIMS की मदद कर रही है।

प्रो. गुप्ता ने मांग की कि भारत में एक राष्ट्रीय डिज़ास्टर मॉर्चरी बनाई जाए, जहाँ एक बार में 400 शव तक सुरक्षित तरीके से रखे और संभाले जा सकें। जरूरत पड़ने पर इन्हें हवाई मार्ग से जल्दी पहुंचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि इससे बड़े हादसों के समय अव्यवस्था नहीं होगी और हर शव को सम्मानजनक तरीके से संभाला जा सकेगा। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां ऐसी व्यवस्था पहले से मौजूद है।

“हर मृत व्यक्ति सम्मान का हकदार है”

प्रो. गुप्ता ने कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ एक है—
परिवारों की पीड़ा कम करना और हर मृत व्यक्ति को सम्मान देना।

AIIMS अब देशभर में शव पुनर्निर्माण और वर्चुअल ऑटोप्सी तकनीक को मानकीकृत करने की योजना बना रहा है, ताकि पूरे भारत में मृतकों के साथ एक समान गरिमा और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जा सके।

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