March 10, 2026
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ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास की पहल से AIIMS-ISRO का ऐतिहासिक करार

  • March 10, 2026
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स्पेस मेडिसिन रिसर्च में भारत को नई उड़ान, अंतरिक्ष चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व की ओर बड़ा कदम @नई दिल्ली अरुण शर्मा देश की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्था ऑल इंडिया

स्पेस मेडिसिन रिसर्च में भारत को नई उड़ान, अंतरिक्ष चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व की ओर बड़ा कदम

@नई दिल्ली अरुण शर्मा

देश की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्था ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), नई दिल्ली ने एक बार फिर चिकित्सा अनुसंधान और वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में अपनी अग्रणी पहचान को मजबूत किया है। AIIMS के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास की पहल और नेतृत्व में AIIMS और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के बीच स्पेस मेडिसिन रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक समझौता (MoU) हुआ है।


यह समझौता भारत के मानव अंतरिक्ष मिशनों, चिकित्सा अनुसंधान और वैज्ञानिक क्षमताओं को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग अंतरिक्ष में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने और नई चिकित्सा तकनीकों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
इन प्रमुख वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की मौजूदगी में हुआ ऐतिहासिक समझौता
इस महत्वपूर्ण समझौते पर
AIIMS के निदेशक — डॉ. एम. श्रीनिवास
और
ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर (HSFC), ISRO के निदेशक — डॉ. दिनेश कुमार सिंह
ने औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए।
कार्यक्रम में ISRO के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव — डॉ. वी. नारायणन विशेष रूप से मौजूद रहे।
समारोह में AIIMS के फिजियोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख और स्पेस मेडिसिन विशेषज्ञ — प्रो. के. के. दीपक ने भी AIIMS द्वारा किए जा रहे स्पेस मेडिसिन अनुसंधान पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
इसके अलावा कार्यक्रम के आयोजन और मीडिया समन्वय में AIIMS मीडिया सेल की प्रभारी — प्रो. रीमा दादा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस अवसर पर AIIMS के डीन, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ चिकित्सक, फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (RDA), AIIMS स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ASA) और सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट्स (SYS) के सदस्य भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
डॉ. एम. श्रीनिवास की दूरदर्शिता से खुलेगा स्पेस मेडिसिन का नया अध्याय
AIIMS के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने इस अवसर पर कहा कि यह साझेदारी भारत को स्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में नई “एस्केप वेलोसिटी” देगी।
उन्होंने कहा कि AIIMS और ISRO का संयुक्त शोध न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए लाभकारी साबित होगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ भारत स्पेस मेडिसिन में भी वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है।
इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होगा संयुक्त शोध
AIIMS और ISRO के बीच हुए इस सहयोग के तहत कई अहम वैज्ञानिक क्षेत्रों में शोध किया जाएगा—
माइक्रोग्रैविटी में मानव शरीर की कार्यप्रणाली
हृदय और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Cardiovascular & Autonomic Regulation)
हड्डियों और मांसपेशियों का स्वास्थ्य
माइक्रोबायोम और इम्यूनोलॉजी अध्ययन
जीनोमिक्स और बायोमार्कर रिसर्च
अंतरिक्ष यात्रियों का मानसिक और व्यवहारिक स्वास्थ्य
AIIMS: चिकित्सा उत्कृष्टता और शोध का राष्ट्रीय प्रतीक
देश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान AIIMS नई दिल्ली लंबे समय से उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और विश्वस्तरीय अनुसंधान के लिए जाना जाता है।
डॉ. एम. श्रीनिवास के नेतृत्व में AIIMS लगातार नए शोध सहयोगों और वैज्ञानिक पहलों के माध्यम से भारत को चिकित्सा और विज्ञान के वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दिला रहा है।
ISRO अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताई भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रेरक यात्रा
इस अवसर पर ISRO के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम साइकिल और बैलगाड़ियों से रॉकेट उपकरण ले जाने के दौर से आज वैश्विक नेतृत्व तक पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि AIIMS जैसे अग्रणी चिकित्सा संस्थानों के साथ सहयोग भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को और मजबूत बनाएगा।

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