March 7, 2026
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देहदान की मिसाल: ‘दधीचि देह दान समिति’ के प्रयास से आर्मी अस्पताल में हुआ त्वचा दान, समाज सेवा का अनोखा संदेश

  • March 6, 2026
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रिधि दर्पण/ अरुण शर्मा राजधानी दिल्ली में मानवता और समाज सेवा की प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। दधीचि देह दान समिति के प्रयासों से सुधीर गुप्ता के नेतृत्व

रिधि दर्पण/ अरुण शर्मा

राजधानी दिल्ली में मानवता और समाज सेवा की प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। दधीचि देह दान समिति के प्रयासों से सुधीर गुप्ता के नेतृत्व में पहली बार आरआर हॉस्पिटल दिल्ली कैंट (आर्मी हॉस्पिटल) में त्वचा दान (स्किन डोनेशन) की महत्वपूर्ण प्रक्रिया सम्पन्न कराई गई। इस मानवीय पहल को चिकित्सा जगत और सामाजिक संगठनों ने सराहनीय कदम बताया है।


AIIMS में सेमिनार में त्वचा दान पर हुई व्यापक चर्चा
दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में आयोजित एक विशेष सेमिनार में त्वचा दान के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर डॉ. ओंकार सिंह (आरआर हॉस्पिटल, दिल्ली कैंट) ने कहा कि आर्मी अस्पतालों में त्वचा दान की अत्यधिक आवश्यकता होती है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में ऐसे मरीज आते हैं जिन्हें गंभीर चोट या जलने जैसी स्थितियों में त्वचा प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है।
उन्होंने कहा कि
“यदि समाज में त्वचा दान की जागरूकता बढ़े और अधिक लोग आगे आएं, तो इससे गंभीर रूप से घायल मरीजों के उपचार में अत्यधिक सहायता मिल सकती है।”
86 वर्षीय सीताराम गोयल का प्रेरणादायक निर्णय
रोहिणी निवासी सीताराम गोयल (86 वर्ष) के परिवार ने मानव सेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए त्वचा दान कराया।
यह प्रक्रिया दधीचि देह दान समिति के उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता और समिति से जुड़े जी.पी. तायल की मौजूदगी में सम्पन्न हुई। उनके मार्गदर्शन में दान की पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक आरआर हॉस्पिटल, दिल्ली कैंट को सौंपी गई।
नेत्रदान और देहदान की भी हुई व्यवस्था
मानव सेवा की इस श्रृंखला में:
नेत्रदान की प्रक्रिया गुरु नानक आई हॉस्पिटल में सम्पन्न कराई गई।
देहदान की प्रक्रिया AIIMS दिल्ली में सम्पन्न कराई गई।
इस प्रकार एक ही परिवार के माध्यम से त्वचा दान, नेत्रदान और देहदान — तीनों प्रकार के दान समाज के हित में संपन्न हुए।
सुधीर गुप्ता के नेतृत्व में बढ़ रही जागरूकता
दधीचि देह दान समिति के उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता ने कहा कि
“देहदान और अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है। मृत्यु के बाद भी यदि शरीर के अंग किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकें, तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं।”
उन्होंने बताया कि समिति पिछले कई वर्षों से देशभर में अंगदान और देहदान के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। उनके अनुसार, समाज में यदि लोग इस विषय को कर्तव्य समझकर अपनाएं, तो हजारों मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।
त्वचा दान क्यों है जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार:
गंभीर रूप से जलने वाले मरीजों के इलाज में त्वचा प्रत्यारोपण अत्यंत आवश्यक होता है।
त्वचा दान से मरीजों के घाव तेजी से भरते हैं और संक्रमण का खतरा कम होता है।
आर्मी अस्पतालों में युद्ध या दुर्घटना से घायल सैनिकों के इलाज में इसकी बड़ी भूमिका होती है।
समाज के लिए प्रेरणा
दधीचि देह दान समिति की यह पहल केवल एक दान की घटना नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि मृत्यु के बाद भी मानव शरीर किसी के जीवन को बचाने का माध्यम बन सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार समाज में जागरूकता बढ़ती रही, तो भारत में अंगदान और देहदान की दिशा में एक नई क्रांति देखी जा सकती है।

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