March 5, 2026
दिल्ली दिल्ली-एनसीआर

गढ़वाल मित्र समिति की बैठकी होली में गूंजा देवभूमि का लोक रंग, जीटीबी एनक्लेव हुआ होलियारों से सराबोर

  • March 4, 2026
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@रिधि दर्पण दिल्ली एनसीआर में प्रवासी उत्तराखंडवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रही गढ़वाल मित्र समिति द्वारा जीटीबी एनक्लेव स्थित समुदाय भवन सभागार में

@रिधि दर्पण

दिल्ली एनसीआर में प्रवासी उत्तराखंडवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रही गढ़वाल मित्र समिति द्वारा जीटीबी एनक्लेव स्थित समुदाय भवन सभागार में भव्य पारंपरिक बैठकी होली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पौड़ी गढ़वाल से विशेष रूप से आमंत्रित हुल्यारों की टीमों ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से समूचे वातावरण को भक्तिरस और लोक रंग में रंग दिया।

लोकगायक होशियार सिंह रावत द्वारा प्रस्तुत विश्वप्रसिद्ध कुमाऊंनी-गढ़वाली लोकगीत “पिचकारी तरा ररा कैन मारि सरा ररा तन मन रिझैगे रिझैगे ह ह होली ऐगे, आजा हे भानुमती पावा बाजरा” ने समां बांध दिया। संगीतकार शेखर जोशी के सुरों के साथ होशियार सिंह रावत की जुगलबंदी ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। ढोलक, हारमोनियम और मंजीरों की थाप पर जब “फूलदेई छम्मा देई” और “आज बिरज में होली रे रसिया” जैसे पारंपरिक होली गीत गूंजे, तो पूरा सभागार देवभूमि की सांस्कृतिक छटा से आलोकित हो उठा।

समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा,

“बैठकी होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत की आत्मा है। दिल्ली जैसे महानगर में रहकर भी हम अपनी परंपराओं, लोकगीतों और संस्कारों को जीवित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मातृशक्ति की बड़ी भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि हमारी संस्कृति आज भी हमारे परिवारों की धड़कन में बसती है।”

उन्होंने सभी अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।

स्थानीय निगम पार्षद वीर सिंह पंवार ने अपने संबोधन में कहा,

“उत्तराखंड की बैठकी होली अपनी शास्त्रीयता, भक्ति और सामूहिकता के लिए जानी जाती है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराते हैं। गढ़वाल मित्र समिति इस दिशा में सराहनीय प्रयास कर रही है।”

कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन केदार सिंह चौहान द्वारा किया गया। उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी और सांस्कृतिक जानकारी से पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित और रोचक बनाए रखा। समय-समय पर होली की परंपराओं, रागों और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देकर उन्होंने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक भी बना दिया।

पहाड़ की होली की विशेषता

उत्तराखंड की बैठकी होली शास्त्रीय रागों पर आधारित होती है, जिसमें प्रायः राग काफी, जंगला काफी और भैरवी का प्रयोग होता है। यह होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि भक्ति, संगीत और सामाजिक एकता का पर्व है। यहां होली गीतों में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, प्रकृति की सुंदरता और लोकजीवन की सरलता का अद्भुत समावेश देखने को मिलता है।

कार्यक्रम में स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति की गरिमामयी उपस्थिति रही। गढ़वाल मित्र समिति के अध्यक्ष हरीश रावत के अनुसार समारोह में भारी संख्या में मातृ शक्ति ने भाग लिया। समाज के प्रमुख विभूतियों में स्थानीय निगम पार्षद वीर सिंह पंवार, पूर्व निगम पार्षद दीप्ति जोशी कांग्रेस पार्टी के मंडल अध्यक्ष नवीन शर्मा,रीना शर्मा , रेणु शर्मा, राम कुमार राणा,हरीश परमार , दिनेश अरोड़ा ,सुनील शर्मा , आर डब्लू ए अध्यक्ष महेंद्र शर्मा पूर्वांचल समाज के पदाधिकारीगण , हिमाचल समाज के अध्यक्ष के के शर्मा , वरिष्ठ समाज सेवी विष्णु पंडित ,समाज के प्रबुद्धजन केदार सिंह चौहान,वीर सिंह गुस्साई,प्रकाश मोहन जुगरान , भगत राम जोशी , गजेंद्र असवाल , इंद्रजीत सिंह रावत आशाराम हिन्दवान , पंकज ध्यानी,सावन चौहान , बद्रीनाथ कीर्तन मंडली के सभी सदस्य गण,गढ़वाल मित्र समिति के सदस्यगण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे

अंत में सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और देवभूमि की संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का संकल्प लिया।

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