February 15, 2026
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Autoimmune Disease : युवा स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रही है ऑटोइम्यून बीमारियांडॉक्टरों ने किया सचेत, समय रहते कदम उठाना जरूरी

  • February 13, 2026
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नई दिल्ली,रिधि दर्पण/ अरुण शर्मा देश में युवा आबादी के लिए ऑटोइम्यून बीमारियां बडी चुनौती पेश कर रही है। विशेषज्ञों ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए शीघ्र

नई दिल्ली,रिधि दर्पण/ अरुण शर्मा

देश में युवा आबादी के लिए ऑटोइम्यून बीमारियां बडी चुनौती पेश कर रही है। विशेषज्ञों ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए शीघ्र समुचित कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया है। साथ ही ऐसी बीमारियों के उपचार के लिए सही संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की सलाह दी है।
दिलशाद गार्डन स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल और कास इंडिया न्यूज नेटवर्क के संयुक्त प्रयास से लाइब्रेरी हॉल में ऑटोइम्यून जागरुकता कार्यक्रम रूमो-ऑर्थो डॉक टॉक आयोजित किया गया। जिसमें कई विशेषज्ञों ने ऑटोइम्यून डिसऑर्डर और इससे पडने वाले प्रभाव पर प्रकाश डाला। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जानकारियां शेयर की जो सामान्य इंसान की जागरूकता को बढाने वाला साबित हुआ।

समय रहते पहचान है जरूरी
रूमो-ऑर्थो डॉक टॉक की शुरूआत स्वामी दयानंद अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर नरोत्तम दास द्वारा दिपोत्सव और निर्सिंग कॉलेज की छात्राओं के सरस्वती वंदना के साथ हुई। इस दौरान उन्होंने ऑटोइम्यून डिसऑर्डर की समय रहते पहचान की उपयोगिता पर कई महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर किया। उन्होंने कहा कि अर्ली डायगनॉसिस किसी भी बीमारी से जंग जीतने की महत्वूर्ण स्थिति है। इससे शुरूआती दौर में ही बीमारियों के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही उन्होेंने ऐसी बीमारियों के प्रति जागरूकता के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान चमत्कार कर सकता है और जानकारी जादू कर सकती है। इस दौरान अर्ली डायग्नॉसिस के महत्व को समझाते हुए उन्होंने एक असल जिंदगी की कहानी बताई। जिसमें एक महिला जो सिरदर्द से पीडित थी, उसकी समस्या को मामूली माना गया और जब सीटी स्कैन हुआ तो ब्रेन ट्यूमर का खुलासा हुआ। उन्होंने कहा कि इस केस में बीमारी का जल्दी पता चलने से बेहतर उपचार और रिकवरी सुनिश्चित हो सकी। उन्होंने कहा कि जिनके परिवार में रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों का इतिहास रहा है, उनके बांकी सदस्यों को इन बीमारियों के प्रति विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के प्रति जागरूकता है जरूरी
स्वामी दयानंद अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉक्टर गौरव शर्मा ने ऑटोइम्यून श्रेणी की ही एक बीमारी एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस और उसके सामाजिक प्रभाव पर महत्वूपर्ण जानकारियां दी। उन्होंने कहा कि इस बीमारी को अगर समय रहते पहचान कर उपचार न किया जाए, जो यह गंभीर रूप से जोडों को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर यह बीमारी युवाओं को होती है, जिनकी आयु 15-35 वर्ष तक हो सकती है और महिलाओं के मुकाबले इस बीमारी से पुरूष अधिक पीडित होते हैं। डॉ गौरव ने बताया कि यह एक प्रॉग्रेसिव कंडिशन है, जिसमें लंबे समय तक और आजीवन उपचार की जरूरत पड सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर मरीज विकलांग हो सकता है। डॉक्टर गौरव के मुताबिक इस तरह की बीमारियों के बारे में सामान्य तौर पर समाज में जानकारी कम है। कई बार लोग ऐसी बीमारियों को सामान्य कमर दर्द मान लेते हैं। उन्होंने पहचान के लिए बताया कि अगर किसी किशोर या युवा को सुबह उठने के बाद 30 मिनट तक शरीर में अकडन हो रहा हो जो, मूवमेंट के बाद कम हो जाता हो और अगर यह स्थिति लगतार तीन महीने तक बनी रहे तो ऐसे लोगों को तत्काल रूमेटोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करती है रुमेटाइड अर्थराइटिस
ऑटोइम्यून श्रेणी के रूमूटाइड अर्थराइटिस पर मेडिसिन एचओडी Dr. Jainet ने कई महत्वूर्ण जानकारियां शेयर की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर रूमेटाइड अर्थराइटिस महिला आबादी को ज्यादा प्रभावित करता हुआ पाया जाता है। उन्होंने कहा कि छोटे जोडों को प्रभावित करने वाली इस बीमारी पर भी गंभीरता जरूरी है। एचओडी मेडिसिन के मुताबिक अर्ली डायग्नॉसिस और सही उपचार की प्रक्रिया लागू करके इस बीमारी को काफी हदतक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई ऐसी दवाइयां उपलब्ध है जिससे प्रभावी तरीके से लक्षणों को प्रबंधित किया जा सकता है।

आंखों की रोशनी छीन सकती है यूवाइटिस
ऑटोइम्यून श्रेणी की एक अन्य बीमारी यूवाइटिस पर अस्पताल की आई एचओडी Dr. Biti ने विस्तार से जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि एंकिलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के कुछ मरीजों में यूवाइटिस हो सकता है। यह एएस के साथ होने वाली एक एसोशिएटेड डिसऑर्डर है। जिसमें आंखों के पिछले हिस्से में सूजन होती है। समय रहते इस बीमारी की पहचान कर उपचार लेना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे आंखों की रोशनी जाने का जोखिम होता है। आंख में लालीपन, तेज रोशनी पडने पर दर्द, धुंधलापन इसके प्रमुख लक्षण हैं।

इंटरेक्टिव चरण में विशेषज्ञों ने दिया लोगों के सवालों का जवाब
कार्यक्रम के इंटरेक्टिव चरण में विशेषज्ञों ने लोगों द्वारा पूछे गए सवालों का बेहद सरल भाषा में जवाब दिया। कार्यक्रम का यह चरण लोगों के लिए खासा उपयोगी साबित हुआ। इस दौरान कई लोगों को ऐसी जानकारियां मिली, जिसे पाने के लिए लंबे समय से वे प्रयास कर रहे थे। इसी दौर में मरीजों ने जोडों की बीमारियों से जुडे कई सवाल किए जिसका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया। लोगों ने लाइफ स्टाइल से संबंधित भी कई सवाल किए जो सामान्य रूप से हर व्यक्ति के लिए उपयोगी होता है।

कई विशेषज्ञों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम के दौरान एचओडी ऑर्थोपेडिक डॉक्टर पानीग्रही, पूर्व एचओडी डॉक्टर दत्ता, डॉक्टर यॉन्गला मौजूद रहे। इसके अलावा ऑर्थोपेडिक विभाग के वरिष्ठ ओटी तकनिशियन राहुल आर पांडे ने रोचक मंच संचालन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अस्पताल की टीम, लाइब्रेरी स्टाफ, सुरक्षागार्डों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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