January 15, 2026
उत्तर प्रदेश

₹100 करोड़ जीएसटी घोटाला: शेल कंपनियों के जाल में फंसा सिस्टम, केंद्रीय GST इंस्पेक्टर नामजद

  • January 12, 2026
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फर्जी ई-वे बिल और इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले में STF का बड़ा खुलासा लखनऊ रिधि दर्पण/ हरि सिंह रावतउत्तर प्रदेश एसटीएफ ने ₹100 करोड़ के बड़े जीएसटी कर

फर्जी ई-वे बिल और इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले में STF का बड़ा खुलासा

लखनऊ रिधि दर्पण/ हरि सिंह रावत
उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने ₹100 करोड़ के बड़े जीएसटी कर चोरी घोटाले का पर्दाफाश करते हुए केंद्रीय जीएसटी विभाग के एक इंस्पेक्टर को आरोपी के रूप में नामजद किया है। यह मामला फर्जी शेल कंपनियों, नकली ई-वे बिल और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के अवैध दावों से जुड़ा है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
एसटीएफ के अनुसार, नई दिल्ली में तैनात केंद्रीय GST इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल पर आरोप है कि उसने विभागीय संरक्षण और रिकॉर्ड में हेरफेर कर घोटाले को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने रिश्वत लेकर निलंबित फर्मों को बहाल कराया, फर्जी कंपनियों को जांच से बचाया और दस्तावेजों में हेरफेर की। फिलहाल वह फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।


जांच में सामने आया है कि यह घोटाला गाजियाबाद के कवि नगर थाना क्षेत्र में दर्ज मामले से जुड़ा है, जिसमें बड़े पैमाने पर फर्जी फर्में बनाकर नकली ई-वे बिल और जाली चालान तैयार किए गए। एसटीएफ ने इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें नई दिल्ली का स्क्रैप कारोबारी हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस, जितेंद्र झा, पुनीत अग्रवाल और शिवम सिंह शामिल हैं।
एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह ने कई शेल कंपनियां खड़ी कर अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया, जिससे सरकार को करीब ₹100 करोड़ का नुकसान हुआ। जांच के दौरान बरामद साक्ष्यों में व्हाट्सऐप चैट, लेन-देन का ब्यौरा और रिकॉर्ड में हेरफेर के संकेत मिले हैं।
जांच एजेंसियों का दावा है कि आदान ऑटोमोबाइल नाम की एक फर्म को इंस्पेक्टर के हस्तक्षेप के बाद बहाल किया गया, जिसके बदले ₹40 हजार की रिश्वत ली गई। इसके अलावा हरियाणा के एक कथित फर्जीवाड़ा नेटवर्क संचालक की भूमिका भी सामने आई है, जिसने कमीशन पर फर्जी फर्में उपलब्ध कराईं।
एसटीएफ ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा उत्तर प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों तक बढ़ाया जा रहा है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह मामला न केवल कर चोरी का, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में मिलीभगत का भी गंभीर उदाहरण माना जा रहा है, जिसने सरकारी निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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