January 15, 2026
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साकेत कोर्ट में कर्मचारी की आत्महत्या से हड़कंप, काम के दबाव को लेकर कोर्ट स्टाफ हड़ताल पर

  • January 10, 2026
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@रिधि दर्पण डिजिटल डेस्क! दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां कोर्ट में कार्यरत एक कर्मचारी ने कोर्ट भवन से कूदकर

@रिधि दर्पण डिजिटल डेस्क!

दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां कोर्ट में कार्यरत एक कर्मचारी ने कोर्ट भवन से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना की पुष्टि साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव धीर सिंह कसाना ने की। उन्होंने बताया कि मृतक अहलमद पद पर कार्यरत था और मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है।

घटना के बाद कोर्ट कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया है। कर्मचारियों ने इसे केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता बताते हुए हड़ताल का ऐलान कर दिया है। हड़ताल के चलते साकेत कोर्ट का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी और वकील मौजूद हैं और माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।

कोर्ट स्टाफ का कहना है कि यह मामला किसी एक कर्मचारी या उसकी शारीरिक स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक उत्पीड़न, अत्यधिक कार्यभार और स्पष्ट नीतियों की कमी का नतीजा है। स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज ने कहा कि अगर ऐसी परिस्थितियों पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में किसी और कर्मचारी के साथ भी ऐसी अनहोनी हो सकती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक स्पष्ट पॉलिसी और वर्क फ्रेम तय नहीं किया जाता, तब तक कर्मचारी काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं।

कर्मचारियों का आरोप है कि एक ओर जजों की लगातार नियुक्तियां हो रही हैं, लेकिन उसी अनुपात में कोर्ट स्टाफ की भर्ती नहीं की जा रही। प्रमोशन में 20-20 साल तक का इंतजार करना पड़ता है, जिससे कर्मचारियों पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें JJA कैडर से अहलमद, असिस्टेंट अहलमद और स्टेनोग्राफर से संबंधित काम न लिए जाने, अहलमद से डिजिटाइजेशन और फोटो कॉपी (CA) का कार्य न कराए जाने, बिना लिखित अनुमति के शाम 5 बजे के बाद कर्मचारियों को न रोके जाने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा फाइलों को तय समय में रिकॉर्ड रूम भेजने की व्यवस्था, ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने, वरिष्ठता के आधार पर पोस्टिंग, केस पेंडेंसी के अनुसार स्टाफ की तैनाती, हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में किए गए प्रशासनिक सुधारों को दोबारा लागू करने और MACP व प्रमोशन समय पर देने की भी मांग की गई है। कर्मचारियों ने यह भी मांग रखी है कि महीने में एक बार हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के समक्ष कर्मचारियों की शिकायतें रखने की व्यवस्था की जाए।

पुलिस को मिले सुसाइड नोट में मृतक कर्मचारी ने खुद को हरीश सिंह मिहार बताया है। नोट में लिखा है कि वह ऑफिस के काम के अत्यधिक दबाव के कारण यह कदम उठा रहा है। उसने यह भी लिखा कि अहलमद बनने के बाद से ही उसके मन में आत्महत्या के विचार आने लगे थे, जिन्हें वह काबू में करने की कोशिश करता रहा, लेकिन अंततः असफल रहा।

इस घटना ने एक बार फिर न्यायिक व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और मानसिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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