March 6, 2026
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सर्दी में नवजातों को खतरा!

  • January 6, 2026
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विशेष देखभाल न मिली तो जानलेवा हो सकती है ठंड**डॉ. अविजीत यादव की चेतावनी: जन्म के पहले 28 दिन सबसे नाज़ुककैलाश दीपक अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ

विशेष देखभाल न मिली तो जानलेवा हो सकती है ठंड**
डॉ. अविजीत यादव की चेतावनी: जन्म के पहले 28 दिन सबसे नाज़ुक
कैलाश दीपक अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ ने दिए अहम सुझाव

@नई दिल्ली रिधि दर्पण अरुण शर्मा ! 
सर्दी का मौसम जहां बड़ों के लिए परेशानी बनता है, वहीं नवजात शिशुओं के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। जन्म के बाद पहले 28 दिन बच्चों के जीवन के सबसे संवेदनशील दिन होते हैं। इस दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।


कैलाश दीपक अस्पताल, पूर्वी दिल्ली के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अविजीत यादव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि ठंड के मौसम में नवजात शिशु अपने शरीर का तापमान स्वयं नियंत्रित नहीं कर पाते, जिससे हाइपोथर्मिया, सांस की दिक्कत और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
ठंड का असर सीधे शिशु की सेहत पर
डॉ. यादव के अनुसार, अत्यधिक ठंड से बच्चे की त्वचा रूखी हो जाती है, शरीर सुस्त पड़ने लगता है और दूध पीने की क्षमता भी कम हो जाती है। यही नहीं, मामूली सर्दी-जुकाम भी तेजी से निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
डॉ. यादव बताते हैं कि अगर नवजात में—
शरीर का रंग नीला या पीला पड़ने लगे
सांस तेज या बहुत धीमी हो
बच्चा सुस्त हो जाए या प्रतिक्रिया न दे
दूध पीना कम कर दे


तो बिना देर किए तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।
घर पर रखें खास ध्यान
विशेषज्ञों ने माता-पिता को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है—
नवजात के कमरे का तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रखें
बच्चे को ज़रूरत से ज़्यादा या बहुत हल्के कपड़े न पहनाएं
मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे को जरूर पिलाएं, यह प्राकृतिक टीका है
स्तनपान से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है
मां की सेहत भी उतनी ही जरूरी
डॉ. अविजीत यादव ने कहा कि मां का स्वस्थ रहना भी बेहद जरूरी है। सर्दियों में मां को पौष्टिक आहार, गर्म कपड़े और पर्याप्त आराम लेना चाहिए ताकि शिशु को भरपूर पोषण मिल सके। उन्होंने कच्चे या खुले दूध के उपयोग से बचने की भी सलाह दी।
डॉक्टर की अपील
“नवजात शिशु खुद अपनी परेशानी नहीं बता सकता। माता-पिता की सतर्कता ही उसकी सुरक्षा है। ठंड में जरा-सी सावधानी बच्चे की जान बचा सकती है।”

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