March 2, 2026
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चार लेबर कोड मजदूरों पर हमला, सरकार ने 51 वर्षों के संघर्ष को किया दरकिनार

  • January 2, 2026
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विश्वकर्मा कहकर मजदूरों को गुलाम बनाने की साजिश : श्याम सुंदर यादव @नई दिल्ली रिधि दर्पण अरुण शर्मा !  समाजवादी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष और वरिष्ठ मजदूर नेता

विश्वकर्मा कहकर मजदूरों को गुलाम बनाने की साजिश : श्याम सुंदर यादव

@नई दिल्ली रिधि दर्पण अरुण शर्मा ! 

समाजवादी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष और वरिष्ठ मजदूर नेता श्याम सुंदर यादव ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि चार लेबर कोड देश के श्रमिक वर्ग के खिलाफ एक सुनियोजित षड्यंत्र हैं, जिनके जरिए 51 वर्षों के ट्रेड यूनियन संघर्ष और 29 श्रम कानूनों की आत्मा को कुचल दिया गया है।
श्याम सुंदर यादव ने कहा कि उन्होंने अपने ट्रेड यूनियन जीवन में कई सरकारें देखीं, जिन्होंने मजदूर आंदोलनों को गंभीरता से लिया और श्रमिकों की समस्याओं का समाधान किया। अंग्रेजी शासनकाल में कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, ट्रेड यूनियन अधिनियम और वेतन भुगतान अधिनियम जैसे कानून बने। आजादी के बाद कांग्रेस सरकारों ने न्यूनतम वेतन अधिनियम, कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम जैसे कानून बनाकर मजदूरों को उद्योगपतियों के शोषण से बचाने का प्रयास किया।


उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार पहली ऐसी सरकार है जिसने मजदूर आंदोलनों को पूरी तरह नजरअंदाज किया और ट्रेड यूनियनों से बिना किसी विचार-विमर्श के 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड थोप दिए। यादव ने कहा कि सरकार किसानों के साथ भी यही रवैया अपनाकर तीन कृषि कानून लाई थी, जिन्हें भारी जनआंदोलन के बाद वापस लेना पड़ा।
फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट सबसे खतरनाक
श्याम सुंदर यादव ने चार लेबर कोड में शामिल फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट को सबसे खतरनाक प्रावधान बताया। उन्होंने कहा कि इससे मजदूरों को नौकरी से निकाले जाने को चुनौती देने का अधिकार समाप्त हो गया है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को खत्म कर दिया गया है। नए प्रावधानों में सेवा समाप्ति पर केवल 15 दिन की ग्रेच्युटी का प्रावधान कर मजदूरों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है, जबकि पुराने कानूनों में एक माह का नोटिस या वेतन और मुआवजा अनिवार्य था।
300 मजदूरों तक उद्योग बंद करने की छूट
यूनियन अध्यक्ष ने कहा कि दूसरा बड़ा नुकसान यह है कि अब 300 तक श्रमिकों वाले उद्योग सरकार की अनुमति के बिना बंद किए जा सकेंगे, जिससे नौकरी की सुरक्षा लगभग समाप्त हो जाएगी। तीसरा बड़ा आघात मजदूरों की अपनी पसंद की ट्रेड यूनियन बनाने के अधिकार पर अप्रत्यक्ष प्रतिबंध है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबाव में बने कानून
श्याम सुंदर यादव ने आरोप लगाया कि ये लेबर कोड बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबाव में बनाए गए हैं और सरकार की रोजगार सृजन में विफलता को छिपाने का प्रयास हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि फिक्स्ड टर्म व्यवस्था से मालिक और मजदूरों के बीच लगातार विवाद होंगे, उत्पादन प्रभावित होगा और उद्योगों को अनावश्यक मुकदमों का सामना करना पड़ेगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब तक कोड के नियम नहीं बने, न ही उन्हें लागू करने की मशीनरी तैयार है और जब सरकारी भर्तियां लगभग बंद हैं, तो इन संहिताओं का पालन कैसे होगा।
29 क्यारियों के फूल चार गमलों में ठूंसे
अंत में श्याम सुंदर यादव ने तीखा व्यंग्य करते हुए कहा,
“ये चार लेबर कोड ऐसे हैं जैसे 29 क्यारियों के फूलों को चार गमलों में ठूंस दिया गया हो, ताकि वे न खिल सकें और न ही अपनी खुशबू मजदूरों तक पहुंचा सकें।”
उन्होंने देश के मजदूर वर्ग से आह्वान किया कि इन श्रमिक-विरोधी कानूनों के खिलाफ एकजुट होकर लोकतांत्रिक संघर्ष तेज किया जाए।

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