March 4, 2026
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दुर्लभ लेकिन घातक बीमारी एमाइलोडिओसिस पर राष्ट्रीय मंथनबहु-विषयक इलाज और आयुष्मान भारत से जोड़ने पर जोर

  • December 30, 2025
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नई दिल्ली रिधि दर्पण अरुण शर्माएमाइलोडिओसिस जैसी अत्यंत दुर्लभ, जटिल और जानलेवा बीमारी को लेकर जागरूकता, समय पर निदान और समग्र उपचार की जरूरत पर राष्ट्रीय स्तर पर

नई दिल्ली रिधि दर्पण अरुण शर्मा
एमाइलोडिओसिस जैसी अत्यंत दुर्लभ, जटिल और जानलेवा बीमारी को लेकर जागरूकता, समय पर निदान और समग्र उपचार की जरूरत पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा हुई। विश्व युवक केंद्र परिसर में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला एवं संवाद में विशेषज्ञों, मरीजों और नीति से जुड़े लोगों ने इस बीमारी को “डिस्पेयर से कनेक्टेड केयर” की दिशा में ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया।


कार्यक्रम का आयोजन राम दयालु सिंह सस्टेनेबल डेवलपमेंट फाउंडेशन (आरडीएसएसडीएफ) के अंतर्गत एमाइलोडिओसिस सपोर्ट ग्रुप ऑफ इंडिया (एएसजीआई) द्वारा, विश्व युवक केंद्र के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का विषय रहा—
“एमाइलोडिओसिस: अवेयरनेस, एजुकेशन एंड कोलेटरल इश्यूज़”।
डॉ. तुलिका सेठ: बहु-विषयक इलाज के बिना नहीं संभव प्रभावी प्रबंधन
एम्स दिल्ली की हेमाटोलॉजी विभाग प्रमुख डॉ. तुलिका सेठ ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि एमाइलोडिओसिस न केवल दुर्लभ बीमारी है, बल्कि इसका समय पर और सटीक निदान भी बड़ी चुनौती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रोग के लिए केवल एक विशेषज्ञ नहीं, बल्कि बहु-विषयक (Multi-disciplinary) उपचार मॉडल की आवश्यकता है, जिसमें हेमाटोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और न्यूरोलॉजी जैसे विभागों का समन्वय हो।
डॉ. सेठ ने सुझाव दिया कि यदि एमाइलोडिओसिस को आयुष्मान भारत हेल्थ पैकेज के तहत शामिल किया जाए, तो देशभर में मरीजों को समय पर इलाज और वित्तीय सुरक्षा मिल सकती है। उन्होंने चिकित्सकों के लिए निरंतर प्रशिक्षण और शोध-आधारित अपडेट को भी अत्यंत आवश्यक बताया।
प्रो. (डॉ.) सतीश चंद्रा: कैंसर से भी घातक हो सकती है यह बीमारी
आरडीएसएसडीएफ एवं एएसजीआई के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सतीश चंद्रा ने कहा कि कई मामलों में एमाइलोडिओसिस कैंसर से भी अधिक घातक सिद्ध होती है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं इस बीमारी से पीड़ित हैं और प्रतिदिन इसकी जटिलताओं से जूझ रहे हैं।
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मरीजों की पीड़ा ने ही उन्हें इस बीमारी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन खड़ा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने घोषणा की कि नए साल से देश का पहला वर्चुअल एमाइलोडिओसिस क्लिनिक शुरू किया जाएगा, जिससे दूर-दराज के मरीज विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे जुड़ सकेंगे।
उदय शंकर सिंह: मरीजों और डॉक्टरों के बीच सेतु बना एएसजीआई
विश्व युवक केंद्र के सीईओ उदय शंकर सिंह ने कहा कि एएसजीआई मरीजों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवाद कार्यक्रमों का उद्देश्य मरीजों को केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि आशा और संबल देना भी है।
देशभर से 300 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़े
कार्यक्रम में एम्स दिल्ली, सर गंगाराम अस्पताल सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की सहभागिता रही। उद्घाटन के बाद चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें मरीजों और परिजनों के सवालों का समाधान किया गया।
देश के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक लोग ऑनलाइन माध्यम से जुड़े, जिससे यह संवाद वास्तव में राष्ट्रीय मंच बन गया।
नीति और व्यवहार के बीच सेतु बना संवाद
कुल मिलाकर यह कार्यक्रम एमाइलोडिओसिस जैसी दुर्लभ बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नीतिगत सुधार, संस्थागत शोध और समन्वित स्वास्थ्य मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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