January 15, 2026
दिल्ली दिल्ली-एनसीआर

न्याय और न्यूरोसाइंस का ऐतिहासिक संगम: ‘न्यूरो जस्टिस ट्रिलॉजी’ का लोकर्पणकार्यात्मक अक्षमता के आकलन में नए युग की शुरुआत

  • December 29, 2025
  • 0

MVC मामलों में न्याय को मिलेगा वैज्ञानिक आधार @नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! भारत में न्याय व्यवस्था और चिकित्सा विज्ञान के बीच एक ऐतिहासिक सेतु का

MVC मामलों में न्याय को मिलेगा वैज्ञानिक आधार

@नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण !

भारत में न्याय व्यवस्था और चिकित्सा विज्ञान के बीच एक ऐतिहासिक सेतु का निर्माण करते हुए आज निम्हांस कन्वेंशन सेंटर, बेंगलुरु में “न्यूरो जस्टिस ट्रिलॉजी” और न्यूरो जस्टिस फ्रेमवर्क हैंडबुक का भव्य लोकर्पण किया गया। यह पहल मोटर वाहन दुर्घटना (MVC) मामलों में मानव जीवन और Functional Disability के आकलन को पूरी तरह नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
प्रसिद्ध फंक्शनल न्यूरोसर्जन डॉ. शरण श्रीनिवासन और न्यूरोरिहैबिलिटेशन विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा शरण द्वारा लिखित यह ट्रिलॉजी न्याय प्रणाली को लक्षण-आधारित (Symptom-Based) सोच से आगे बढ़ाकर कार्य-आधारित (Function-Based) न्याय की ओर ले जाने का आह्वान करती है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने किया लोकर्पण
इस ऐतिहासिक कृति का औपचारिक लोकर्पण माननीय श्री न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्नाटक सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री दिनेश गुंडू राव ने की। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. वी. रविंद्रन की गरिमामयी उपस्थिति रही।
न्याय, चिकित्सा और नीति का साझा मंच
लोकर्पण समारोह में कर्नाटक विधानसभा के उपाध्यक्ष श्री रुद्रप्पा लामानी, कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए. वी. चंद्रशेखर, बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त श्री सीमंथ कुमार सिंह, न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मानस पाणिग्रही, WFNS के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. वी. डी. सिन्हा और पैरा-ओलंपियन एवं पद्मश्री सम्मानित के. वाई. वेंकटेश सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।


“न्याय और न्यूरोसाइंस का सार्थक मिलन”
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने कहा कि यह ट्रिलॉजी कानून, न्यूरोसाइंस और नैतिकता के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित करती है।
उन्होंने कहा, “भविष्य की न्याय प्रणाली के लिए अंतर्विषयी (Interdisciplinary) दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।”
MVC मामलों के लिए नई न्यायिक राह
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. वी. रविंद्रन, जिन्होंने अपने कार्यकाल में MVC से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसले दिए, ने इस कृति को न्यायाधीशों के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न्यूरोलॉजिकल अक्षमता की जटिलताओं को समझने में न्यायपालिका को ठोस आधार प्रदान करती है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया जनहित से जुड़ा मॉडल
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा कि यह फ्रेमवर्क सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय—दोनों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा, “ऐसे विचार नेतृत्व से ही नागरिकों के जीवन में वास्तविक सुधार संभव है।”
‘ऑपरेशन थिएटर से कोर्टरूम तक’ की यात्रा
लेखक डॉ. शरण श्रीनिवासन ने कहा—
“हमने ऐसे मरीज देखे हैं जो हादसे से बच तो गए, लेकिन न्याय से वंचित रह गए, क्योंकि उनकी मस्तिष्क संबंधी कार्यात्मक क्षति कागज़ों में दिख नहीं पाती। न्यूरो जस्टिस का उद्देश्य मस्तिष्क विज्ञान को न्यायिक सत्य में बदलना है।”
डॉ. प्रतिभा शरण ने ‘इनविज़िबल डिसएबिलिटी’ पर जोर देते हुए कहा कि स्मृति, व्यवहार और निर्णय क्षमता जैसी क्षतियां अक्सर मुआवज़े में अनदेखी रह जाती हैं।
“फंक्शन ही जीवन है—और जब इसे नजरअंदाज किया जाता है, तो परिवार इसकी कीमत चुकाता है,” उन्होंने कहा।
भारत का पहला ‘न्यूरो जस्टिस फ्रेमवर्क’
कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि रही Neuro Justice Framework (NJF) v1.0 का अनावरण, जो भारत का पहला कार्यात्मक अक्षमता मापन मॉडल है।
इसके प्रमुख बिंदु हैं—
TAPS सिस्टम: व्यक्ति, परिवार और समाज पर प्रभाव का त्रि-आयामी आकलन
NJF ट्रायड: दुर्घटना से पहले की स्थिति, पुनर्स्थापन की संभावना और न्यायसंगत मुआवज़ा
WHO और RPwD Act 2016 का व्यावहारिक एकीकरण
लंबित दावों को मिलेगा समाधान
देश में लगभग 9 लाख मोटर दुर्घटना दावे लंबित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फ्रेमवर्क ट्रिब्यूनल मामलों के निपटारे का समय 50% तक घटा सकता है और पीड़ितों को समय रहते न्याय दिला सकता है।
न्यूरो जस्टिस ट्रिलॉजी न केवल न्याय प्रणाली के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ता एक ठोस कदम भी है—जहां न्याय केवल मुआवज़ा नहीं, बल्कि जीवन की पुनर्स्थापना बने।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *