January 15, 2026
दिल्ली दिल्ली-एनसीआर

162 साल पुराना टाउन हॉल फिर जिएगा अपनी शान!एमसीडी जल्द करेगी भव्य रिवैम्प—ऐतिहासिक इमारत में शिफ्ट हो सकता है जोनल ऑफिस

  • December 11, 2025
  • 0

अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! दिल्ली के दिल—चांदनी चौक में स्थित 162 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर टाउन हॉल एक बार फिर अपनी पुरानी रौनक लौटाने की तैयारी में

अरुण शर्मा रिधि दर्पण !

दिल्ली के दिल—चांदनी चौक में स्थित 162 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर टाउन हॉल एक बार फिर अपनी पुरानी रौनक लौटाने की तैयारी में है। दिल्ली नगर निगम (MCD) इस विरासत भवन के बड़े पैमाने पर रिवैम्प (पुनरुद्धार) की योजना को अंतिम रूप देने के करीब है। इसके लिए कंसल्टेंट द्वारा विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, और संकेत साफ हैं—काम अब बस शुरू ही होने वाला है।

टाउन हॉल में फिर गूंज सकती है फाइलों की खनक—शिफ्ट हो सकता है जोनल ऑफिस

एमसीडी अपने सिटी सदर–पहाड़गंज जोनल ऑफिस को इस धरोहर भवन में शिफ्ट करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
यह वही टाउन हॉल है जो 2010 से 2021 तक एकीकृत एमसीडी का मुख्यालय रहा और अब दोबारा से प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।

पुरानी इमारत की जर्जर हालत बनी चिंता की वजह

हिंदू कॉलेज के पास स्थित मौजूदा सिटी सदर ऑफिस की इमारत की हालत काफी खराब हो चुकी है। दीवारों में दरारें, टूटे प्लास्टर और सीमित जगह ने एमसीडी को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है।
अगस्त में निगम ने एक कंसल्टेंट नियुक्त किया, जिसे यह पता लगाने का जिम्मा दिया गया कि कहां मरम्मत जरूरी है और कितना खर्च आएगा।

कंसल्टेंसी फीस ₹18 लाख तय की गई है, जबकि आने वाली डीपीआर में पूरे परिसर की मरम्मत, संरचनात्मक मजबूती और एडेप्टिव री-यूज़ की योजना शामिल होगी।

G20 से पहले हुई थी सतही मरम्मत—अब चाहिए बड़ा बदलाव

पिछले वर्ष G20 सम्मेलन की तैयारी में एमसीडी ने कुछ सफेदी और छोटी-मोटी मरम्मत कराई थी, लेकिन इसका असर सीमित रहा।
अधिकारियों के मुताबिक—
“मुख्य हॉल की छत का प्लास्टर कई जगहों पर गिर चुका है। सुरक्षा को देखते हुए कुछ हिस्सों में आवाजाही रोकनी पड़ी है।”

1860–63 में बना टाउन हॉल—चांदनी चौक की शान, इतिहास की जान

ब्रिटिशकालीन इंडो–कोलोनियल शैली में बना टाउन हॉल लगभग 13,753 वर्गमीटर में फैला है और ग्रेड–A हेरिटेज स्ट्रक्चर है।
लंबे समय से इस भवन को होटल, म्यूज़ियम, रेस्तरां कॉम्प्लेक्स जैसे कई रूप देने की चर्चाएँ होती रहीं, लेकिन कोई भी प्रस्ताव अंतिम नहीं हो सका।

कई संस्थानों ने दिखाई रुचि, पर योजनाएँ अधर में

एमसीडी ने पहले IGNCA और आगा खां ट्रस्ट फॉर कल्चर के साथ दस्तावेजों के संरक्षण और आर्काइव सेंटर की योजनाएँ शुरू की थीं, पर वे भी आगे नहीं बढ़ पाईं।
संस्कृति मंत्रालय ने भी इसे 33 साल की लीज़ पर लेकर विश्वस्तरीय संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की इच्छा जताई थी। पर राजस्व साझा मॉडल पर मतभेद के चलते वह प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में चला गया।

अभी भी सवाल—धरोहर का क्या होगा भविष्य?

एमसीडी अधिकारियों का कहना है—
“इतिहास से जुड़ी इस इमारत का उपयोग जनता के हित में होना चाहिए। टाउन हॉल की विरासत को बचाना हमारी जिम्मेदारी है।”

जोनल ऑफिस का इंतज़ार—और टाउन हॉल की नई शुरुआत

यदि योजना मंजूर होती है, तो जल्द ही टाउन हॉल का गलियारा फिर से चहल–पहल से भर सकता है।
फाइलों की आवाज़, ऑफिसों की हलचल और जनता की आवाजाही इसे दोबारा दिल्ली का जीवंत प्रशासनिक केंद्र बना सकती है।

रिवैम्प के बाद उम्मीद है कि 162 साल पुराना टाउन हॉल न केवल अपनी ऐतिहासिक गरिमा को फिर से हासिल करेगा, बल्कि दिल्ली की धरोहर और आधुनिक उपयोगिता का नया प्रतीक बनकर उभरेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *