January 15, 2026
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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कहर: मनुष्य ही नहीं, जीव-जंतु और जानवर भी भारी संकट में

  • November 26, 2025
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विशेषज्ञों की चेतावनी—“यह इलाका अब रहने लायक नहीं रहा” हरि सिंह रावत रिधि दर्पण। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण ने अब जनजीवन को गंभीर खतरे में

विशेषज्ञों की चेतावनी—“यह इलाका अब रहने लायक नहीं रहा”

हरि सिंह रावत रिधि दर्पण।

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण ने अब जनजीवन को गंभीर खतरे में डाल दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में मौजूद जहरीले कणों ने स्थिति को इतना भयावह बना दिया है कि यह क्षेत्र आम नागरिकों के लिए रहने लायक नहीं बचा है। प्रदूषण का यह संकट केवल मनुष्यों को ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं को भी उतनी ही तेजी से प्रभावित कर रहा है।

बीमारियों से पीड़ित लोगों पर सबसे ज्यादा खतरा

डॉक्टरों के अनुसार प्रदूषण का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव उन लोगों पर हो रहा है जो पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त हैं—

प्रेग्नेंट महिलाएं

सांस व अस्थमा के मरीज

टीबी (क्षय रोग) से पीड़ित लोग

डायबिटीज के मरीज

दिल और ब्लड प्रेशर के रोगी

सीनियर सिटीजन (गौर वृद्धजन)

दिमागी रोगों से पीड़ित मरीज

एड्स/HIV से पीड़ित लोग, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कमजोर होती है

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीज हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 कणों के कारण दोगुनी तेजी से संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। HIV/एड्स से पीड़ित लोगों में सांस संबंधी समस्याएं, फेफड़ों के संक्रमण और थकान बेहद तेजी से बढ़ रही है।

प्रदूषण मनुष्य के हर अंग को कर रहा प्रभावित

नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण का असर आंखों पर सबसे पहले दिखता है। लगातार जलन, लालिमा, एलर्जी और कॉर्निया प्रभावित होने की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं।
न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार प्रदूषण मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रहार कर रहा है—चिड़चिड़ापन, चिंता, सिरदर्द और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ चुका है।
अस्थि रोग विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से हड्डियों की कमजोरी, जोड़ों में दर्द और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर गहरा असर पड़ रहा है।

जीव-जंतु और जानवर भी गंभीर खतरे में

वेटरनरी डॉक्टरों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि प्रदूषण का घातक असर जानवरों पर मनुष्यों जितना ही खतरनाक है। हवा में मौजूद जहरीले कण

उनके फेफड़ों पर भारी दबाव डाल रहे हैं

दूध देने वाले पशुओं की क्षमता प्रभावित कर रहे हैं

पालतू जानवरों में एलर्जी, खांसी-जुकाम और सांस की समस्याएं बढ़ा रहे हैं

पक्षियों की संख्या और उनकी उड़ान क्षमता दोनों को प्रभावित कर रहे हैं
डॉक्टरों का कहना है कि “जितना वातावरण शुद्ध रहेगा, उतना ही जीव-जंतु और जानवर स्वस्थ रहेंगे।” प्रदूषण के कारण पशुओं में भी संक्रमण और वायरल रोग तेजी से फैल रहे हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी—स्थिति और भयावह हो सकती है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अगर प्रदूषण नियंत्रण के मजबूत कदम तुरंत नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में:

गंभीर बीमारियों की संख्या कई गुना बढ़ेगी

बच्चों में फेफड़ों से संबंधित बीमारियां सामान्य हो जाएंगी

बुजुर्गों और बीमार मरीजों के लिए हालात और चुनौतीपूर्ण होंगे

जानवरों और पक्षियों की प्रजातियों पर भी अस्तित्व का संकट गहराएगा

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अब केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि जनजीवन, स्वास्थ्य, पाशु-पक्षी, और भविष्य—सभी के लिए सीधा खतरा बन चुका है। विशेषज्ञों ने सरकार और नागरिकों दोनों से आग्रह किया है कि “अगर अभी भी प्रदूषण को काबू में नहीं किया गया, तो आने वाले वर्ष दिल्ली-एनसीआर के लिए और भी भयावह साबित हो सकते हैं।”

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