January 15, 2026
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महिमा चौधरी की खुली बात: “मुझे अपना कैंसर परिवार से छुपाना पड़ा”—अब उनकी कहानी युवतियों के लिए उम्मीद की मिसाल बनी

  • November 17, 2025
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नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! युवा महिलाओं में बढ़ते ब्रेस्ट कैंसर पर एक ज़रूरी और भावनात्मक बातचीत हाल ही में देश की राजधानी में केंद्र बिंदु

नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण !

युवा महिलाओं में बढ़ते ब्रेस्ट कैंसर पर एक ज़रूरी और भावनात्मक बातचीत हाल ही में देश की राजधानी में केंद्र बिंदु बनी। महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर को समझने और उससे मुकाबला करने के लिए एक विशेष अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस पहल को Breast Cancer in Young Women Foundation (BCYWF) और Indian Oncology Foundation (IOF) ने मिलकर शुरू किया था, जिसकी अगुवाई पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार वैद, चेयरमैन—ऑन्कोलॉजी, मेदांता मेडिसिटी ने की।

इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण बॉलीवुड अभिनेत्री महिमा चौधरी रहीं, जिन्होंने पहली बार खुलकर अपने ब्रेस्ट कैंसर के संघर्ष के बारे में बात की। महिमा, जो हमेशा अपनी चमकदार स्क्रीन प्रेज़ेंस के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने अपने कैंसर की खबर अपने परिवार तक को नहीं बताई थी। वह सदमे और डर से खुद को संभालने की कोशिश में इस सच्चाई को दिल में दबाकर जीती रहीं।

लेकिन उसी महिमा ने अपनी निजी लड़ाई को दूसरों के लिए हिम्मत में बदल दिया। उनका सफर—जिसमें डर, संदेह, दर्द, और धीरे-धीरे उभरती उम्मीद शामिल थी—युवा महिलाओं को गहराई से छू गया। महिमा का संदेश स्पष्ट था:
अपने शरीर के संकेतों को हल्के में न लें। किसी भी बदलाव को नजरअंदाज न करें। और सबसे ज़रूरी—समय पर डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि यह कदम जिंदगी बचा सकता है।

भारत में ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन चुका है, और चिंताजनक बात यह है कि इसका असर कम उम्र की महिलाओं पर भी तेजी से बढ़ रहा है। 45 साल से कम उम्र की महिलाओं में मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही थी, और विशेषज्ञों का कहना था कि इसकी बड़ी वजह है—जीवनशैली में बदलाव, देर से मातृत्व, हार्मोनल और प्रजनन संबंधी कारण, और लक्षणों के प्रति जागरूकता की कमी।

युवा महिलाओं में अक्सर ब्रेस्ट टिश्यू घना होने के कारण शुरुआती स्टेज में कैंसर पकड़ना कठिन हो जाता था। इसी वजह से कई मामलों में देर से डायग्नोसिस होता था, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता था और परिणाम भी कमजोर पड़ते थे।

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