January 15, 2026
उत्तराखंड

जसवंत बाबा स्मृति टूर्नामेंट 2025: रोमांचक फाइनल में अंकित क्लब काण्डा मल्ला चैंपियन, युवा समिति उपविजेता

  • November 17, 2025
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पौड़ी गढ़वाल हरि सिंह रावत रिधि दर्पण! जसवंत बाबा की अमर वीरता और बलिदान को समर्पित जसवंत बाबा स्मृति टूर्नामेंट 2025 में इस वर्ष भी ज़बरदस्त रोमांच देखने

पौड़ी गढ़वाल हरि सिंह रावत रिधि दर्पण!

जसवंत बाबा की अमर वीरता और बलिदान को समर्पित जसवंत बाबा स्मृति टूर्नामेंट 2025 में इस वर्ष भी ज़बरदस्त रोमांच देखने को मिला। फाइनल मुकाबले में अंकित क्लब काण्डा मल्ला ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया, जबकि युवा समिति काण्डा मल्ला उपविजेता रही।
फाइनल मुकाबला तीन सेटों तक चला। पहला सेट युवा समिति ने कड़े संघर्ष के बाद 31–29 से जीता। इसके बाद अंकित क्लब ने दमदार वापसी करते हुए दूसरा सेट 25–21 और निर्णायक सेट 25–14 से जीतकर टूर्नामेंट की ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमा लिया।
विजय के बाद अंकित क्लब के टीम मैनेजर आशीष रावत और युवा समिति काण्डा मल्ला के अध्यक्ष रोहित नेगी ने अपनी-अपनी टीमों के प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त करते हुए खिलाड़ियों की मेहनत, समर्पण और टीम भावना की प्रशंसा की।

जसवंत बाबा: वह शूरवीर जिन्हें दुश्मन भी ‘बाबा’ कहने लगे
यह टूर्नामेंट देश के अमर वीर राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की स्मृति में आयोजित किया जाता है। 1962 के भारत–चीन युद्ध में अरुणाचल प्रदेश के नूरानंग पोस्ट पर जसवंत बाबा ने ऐसी वीरता दिखाई कि आज भी भारतीय सेना उनकी गाथा को गर्व से सुनाती है।

उन्होंने 3 दिनों तक अकेले चीनी सेना को रोककर रखा, ताकि भारतीय सेना सुरक्षित पुनर्गठन कर सके।

सीमित हथियारों और गोला-बारूद के बावजूद जसवंत बाबा ने कई चीनी सैनिकों को ढेर किया और उन्हें लगातार भ्रमित करते रहे।

कहा जाता है कि जब तक उनके पास गोलियां रहीं, वे लड़ते रहे, और जब गोलियां खत्म हुईं तो उन्होंने अपने जीवन का बलिदान देकर मातृभूमि की रक्षा की।

उनकी वीरता देखकर चीनी सेना भी प्रभावित हुई और सम्मान स्वरूप उनकी मूर्ति बनाकर लौटाई, जो आज भी उनके शौर्य की साक्षी है।

भारतीय सेना उन्हें आज भी सेवारत सैनिक मानती है — उनकी पोस्ट पर रोज़ाना भोजन और चाय परोसी जाती है, जैसे कोई सैनिक ड्यूटी पर हो।

जसवंत बाबा की यह अतुलनीय शौर्यगाथा आज भी युवाओं को देशभक्ति, साहस और निष्ठा का पाठ पढ़ाती है।

टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट कौशल और खेलभावना का प्रदर्शन किया, वहीं दर्शकों ने भी पूरे जोश से खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। समापन समारोह में विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी और पुरस्कार प्रदान किए गए।
इस वर्ष का टूर्नामेंट एक बार फिर यह संदेश देकर समाप्त हुआ कि जसवंत बाबा की अमर गाथा युवा पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगी।

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