January 15, 2026
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शोएब इकबाल का इस्तीफा बना सियासी तूफान: उपचुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका

  • November 10, 2025
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नई दिल्ली अरुण शर्मा ! दिल्ली नगर निगम के आगामी उपचुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब वरिष्ठ नेता और

नई दिल्ली अरुण शर्मा !

दिल्ली नगर निगम के आगामी उपचुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक शोएब इकबाल ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। शोएब इकबाल का यह कदम न केवल पार्टी के भीतर हलचल मचा गया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

शोएब इकबाल दिल्ली की राजनीति में एक प्रभावशाली नाम रहे हैं। वह मटिया महल विधानसभा क्षेत्र से छह बार विधायक रह चुके हैं, और इस इलाके में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। मगर इस बार इस्तीफे के पीछे की वजह ने आम आदमी पार्टी के अंदर नए विवाद को जन्म दे दिया है।

पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, शोएब इकबाल ने बिना किसी विचार-विमर्श या संगठन की अनुमति के अपने रिश्तेदार को उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित कर दिया था, जिसे पार्टी अनुशासनहीनता मानती है।
एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —> “आम आदमी पार्टी हमेशा अपने समर्पित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देती है। लेकिन शोएब इकबाल ने संगठन से परामर्श किए बिना व्यक्तिगत निर्णय लिया, जो पार्टी की नीति के खिलाफ है।”

शोएब इकबाल ने इस्तीफा देते हुए कहा कि “मैं पार्टी की विचारधारा और नीतियों से अब खुद को जोड़ नहीं पा रहा हूं। पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है, और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शोएब इकबाल का यह फैसला नगर निगम के उपचुनाव में AAP के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। दिल्ली के पुराने मुस्लिम वोट बैंक वाले इलाकों में इकबाल का प्रभाव हमेशा निर्णायक रहा है।

इधर, यह भी अटकलें तेज हैं कि शोएब इकबाल कांग्रेस के संपर्क में हैं और जल्द ही कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह कदम न केवल AAP की चुनावी रणनीति को कमजोर करेगा बल्कि कांग्रेस को एक नई ऊर्जा भी प्रदान कर सकता है।

राजनीतिक गलियारों में अब यही चर्चा है कि —
क्या शोएब इकबाल का यह इस्तीफा आम आदमी पार्टी की साख को हिला देगा?
या फिर AAP नई रणनीति बनाकर इस नुकसान की भरपाई कर पाएगी?

फिलहाल, दिल्ली के उपचुनाव की राजनीति इस इस्तीफे से और गर्मा गई है, और सभी की निगाहें अब मटिया महल और आसपास के वार्डों पर टिक गई हैं, जहां शोएब इकबाल का प्रभाव सबसे अधिक माना जाता है

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