अचानक वजन घटना कैंसर का संकेत हो सकता है, दिल्ली के डॉक्टरों की चेतावनी
- November 3, 2025
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विशेषज्ञों ने कहा— बिना वजह वजन घटना या अन्य बदलावों को न करें नज़रअंदाज़, कैंसर उपचार में नई तकनीकें दे रही हैं जीवन की नई उम्मीद नई दिल्ली,
विशेषज्ञों ने कहा— बिना वजह वजन घटना या अन्य बदलावों को न करें नज़रअंदाज़, कैंसर उपचार में नई तकनीकें दे रही हैं जीवन की नई उम्मीद नई दिल्ली,
विशेषज्ञों ने कहा— बिना वजह वजन घटना या अन्य बदलावों को न करें नज़रअंदाज़, कैंसर उपचार में नई तकनीकें दे रही हैं जीवन की नई उम्मीद
नई दिल्ली, अरुण शर्मा
बिना किसी प्रयास के कुछ किलो वजन घट जाना भले ही सुनने में अच्छा लगे, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह शरीर के भीतर छिपी किसी गंभीर बीमारी — कैंसर — का संकेत भी हो सकता है।
कैलाश दीपक हॉस्पिटल, दिल्ली के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. अजय व्यास ने बताया, “अगर 70 किलोग्राम वजन वाला व्यक्ति अचानक बिना डाइट या एक्सरसाइज़ बदले लगभग सात किलोग्राम वजन खो देता है, तो यह चेतावनी का संकेत है। शरीर के वजन में 10 प्रतिशत तक की कमी कैंसर का एक आम लक्षण है।”
डॉ. व्यास ने बताया कि वजन घटना कैंसर के शुरुआती लक्षणों में से एक है, लेकिन अक्सर लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। उन्होंने कहा, “स्तनों में गांठ दिखना स्तन कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है, इसलिए नियमित रूप से स्व-परीक्षण (self-examination) बेहद ज़रूरी है। लगातार बलगम या खून के साथ खांसी रहना फेफड़ों के कैंसर की ओर इशारा कर सकता है, जबकि मलत्याग की आदतों में बदलाव या बार-बार उल्टी होना पाचन तंत्र के कैंसर से जुड़ा लक्षण हो सकता है।”

हालांकि कैंसर का नाम सुनते ही लोगों में डर पैदा हो जाता है, लेकिन डॉ. व्यास के अनुसार आज कैंसर उपचार पहले से कहीं अधिक उन्नत और प्रभावी हो गया है।
उन्होंने कहा, “यदि कैंसर पहले या दूसरे चरण में पकड़ में आ जाए तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। बाद के चरणों में हमारा लक्ष्य रोग को नियंत्रित रखना और मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर करना होता है।”
उन्होंने बताया कि कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के दौरान बाल झड़ना, कमजोरी या थकान जैसे दुष्प्रभाव अस्थायी होते हैं। “उपचार समाप्त होने के बाद बाल दोबारा उग आते हैं, और अब प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा (reconstructive surgery) में प्रगति के चलते सर्जरी के निशान भी आसानी से सुधारे जा सकते हैं। स्तन कैंसर के मामलों में तो अब स्तन पुनर्निर्माण सर्जरी (breast reconstruction) से महिलाओं का आत्मविश्वास फिर लौट आता है।”

डॉ. व्यास ने बताया कि रेडियोथेरेपी तकनीक भी काफी विकसित हो चुकी है। पहले जहां इससे त्वचा पर कालेपन के दाग आ जाते थे, अब नई मशीनें त्वचा को कम नुकसान पहुंचाती हैं।
उन्होंने बताया कि आज कैंसर उपचार में प्रिसीजन मेडिसिन (Precision Medicine) का युग शुरू हो चुका है।
“अब कीमोथेरेपी हर मरीज के लिए एक जैसी नहीं होती। हम अब मरीज की जैविक और आनुवंशिक आवश्यकताओं के अनुसार टार्गेटेड थेरेपी (targeted therapy) और इम्यूनोथेरेपी (immunotherapy) देते हैं। प्रोटॉन थेरेपी जैसी तकनीक ट्यूमर को अधिक सटीकता से निशाना बनाती है, जबकि रोबोटिक सर्जरी से जटिल ऑपरेशन भी सुरक्षित और कम दर्दनाक हो गए हैं। न्यूक्लियर मेडिसिन में अब ल्यूटेशियम थेरेपी (Lutetium Therapy) जैसी उन्नत विधियाँ PET-CT से भी बेहतर परिणाम दे रही हैं,” उन्होंने बताया।
इस अवसर पर कैलाश दीपक हॉस्पिटल के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि कैंसर मामलों में बढ़ोतरी आधुनिक जीवनशैली का भी नतीजा है।
“आजकल हमारी खानपान की आदतें पहले जैसी नहीं रहीं। प्रोसेस्ड फूड, तनाव और प्रदूषण जैसे कारक कैंसर के खतरे को बढ़ा रहे हैं। हालांकि, जागरूकता और बेहतर जांच सुविधाओं के कारण अब अधिक मामलों की शुरुआती अवस्था में ही पहचान हो रही है, जो एक सकारात्मक पहलू है,” उन्होंने कहा।
दोनों विशेषज्ञों ने जनता को एक ही संदेश दिया—
“अपने शरीर की चेतावनियों को कभी नज़रअंदाज़ न करें।”
अचानक वजन घटना, लगातार खांसी, किसी हिस्से में गांठ या पाचन में बदलाव — ये सभी संकेत तुरंत चिकित्सकीय जांच की मांग करते हैं।
डॉ. व्यास ने कहा, “कैंसर अब हमेशा मृत्यु का पर्याय नहीं रहा। शुरुआती पहचान और आधुनिक उपचार से हम मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं। ज़रूरत है अपने शरीर की सुनने और समय रहते कदम उठाने की।”
जैसे-जैसे तकनीक कैंसर उपचार को नया रूप दे रही है, विशेषज्ञों को उम्मीद है कि जागरूकता, समय पर जांच और व्यक्तिगत उपचार के ज़रिए आने वाले समय में कैंसर से उबरने की दर और भी बेहतर