25 दिसंबर से खुलेंगी “अटल कैंटीन”: गरीबों को सस्ती थाली,
- October 26, 2025
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अटल जी की विचारधारा को सलाम दिल्ली सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर शुरू की जनसेवा से जुड़ी योजना — “गरीब भूखा न सोए”
अटल जी की विचारधारा को सलाम दिल्ली सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर शुरू की जनसेवा से जुड़ी योजना — “गरीब भूखा न सोए”
अटल जी की विचारधारा को सलाम दिल्ली सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर शुरू की जनसेवा से जुड़ी योजना — “गरीब भूखा न सोए” मिशन की नई कड़ी
नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण !
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती (25 दिसंबर) के अवसर पर दिल्ली सरकार राजधानी में “अटल कैंटीन योजना” शुरू करने जा रही है।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना के तहत राजधानी में पहले चरण में 25 अटल कैंटीनें खोली जाएंगी, जहां गरीबों और जरूरतमंदों को ₹5 से ₹10 में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।यह पहल न केवल एक सामाजिक-आर्थिक कदम है, बल्कि यह अटल बिहारी वाजपेयी के मानवीय, साहित्यिक और जनसेवी दर्शन को भी साकार करती है — “राजनीति में भी मानवता का स्थान सर्वोपरि है।”दिल्ली शहरी सुधार बोर्ड (DUDB) ने 16 विधानसभा क्षेत्रों में कैंटीनों के लिए टेंडर जारी किए हैं।इनमें शामिल हैं —राजौरी गार्डन, मोती नगर, द्वारका, विकासपुरी, जनकपुरी, छतरपुर, संगम विहार, ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली, मटियाला, कस्तूरबा नगर, आरके पुरम, मालवीय नगर, तिलक नगर, पश्चिम विहार और हरिनगर।हर कैंटीन में नाश्ता और दोपहर का भोजन मिलेगा, जिसे महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय एनजीओ के माध्यम से संचालित किया जाएगा।सरकार का लक्ष्य अगले चरण में इसे 100 अटल कैंटीनों तक विस्तारित करना है।अटल बिहारी वाजपेयी: राजनीति के कवि, पत्रकारिता के शिल्पी और राष्ट्रभाव के युगपुरुषअटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में से थे जिन्होंने विचार, शब्द और कर्म — तीनों में संतुलन साधा।वे केवल एक प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि एक कवि, पत्रकार, संवेदनशील वक्ता और जनसेवक थे जिन्होंने राजनीति को “राष्ट्र-सेवा” का पर्याय बनाया।वाजपेयी भारतीय राजनीति में संवाद, सहमति और सौम्यता के प्रतीक थे।उन्होंने विपक्ष में रहते हुए भी लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान किया और प्रधानमंत्री रहते हुए विपक्ष को बोलने का पूरा अवसर दिया।उनकी नीति थी —> “सरकारें बनती-बिगड़ती रहें, लेकिन देश और लोकतंत्र की गरिमा बनी रहनी चाहिए।”उनके कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ बस सेवा, पोखरण परमाणु परीक्षण, और सड़क विकास योजनाएं (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) जैसी पहलें देश के स्वाभिमान और विकास की मिसाल बनीं।राजनीति में आने से पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने पत्रकारिता को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया।वे “राष्ट्रधर्म”, “पंचजन्य” और “वीर अर्जुन” जैसे पत्र-पत्रिकाओं से जुड़े रहे।उनकी कविताएं जैसे —“हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा…”आज भी संघर्ष और प्रेरणा की प्रतीक हैं।उनकी भाषा में दृढ़ता थी पर कटुता नहीं, और यही गुण उन्हें एक असाधारण नेता और अविस्मरणीय वक्ता बनाता था। अटल कैंटीन: सेवा भावना का जीवंत उदाहरणमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा “अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन आम आदमी के लिए समर्पित था। यह योजना उन्हीं की भावना को धरातल पर उतारने का प्रयास है — कोई भी दिल्लीवासी भूखा न सोए।”सरकार के अनुसार, इन कैंटीनों में न केवल सस्ती थाली उपलब्ध होगी, बल्कि यह स्वच्छता, पोषण और रोजगार का माध्यम भी बनेगी।₹5 से ₹10 में पौष्टिक भोजन (दाल, चावल, सब्जी, रोटी, खिचड़ी आदि)महिला समूहों द्वारा संचालनडिजिटल भुगतान और निगरानी की सुविधाहर विधानसभा क्षेत्र में एक कैंटीन25 दिसंबर से पहले चरण की शुरुआत अटल जी की विरासत से प्रेरित योजनाएंप्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनास्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्गसर्व शिक्षा अभियानपोखरण-II परमाणु परीक्षणबस-राजनय: लाहौर यात्रा (1999)अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन बताता है कि “राजनीति केवल सत्ता का नहीं, संस्कार का माध्यम है।”“अटल कैंटीन योजना” इसी सोच का विस्तार है — जहां भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का प्रतीक बनता है।Categories

