January 15, 2026
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प्रधानमंत्री मोदी 28 अक्टूबर को दिल्ली में करेंगे छठ पूजा

  • October 26, 2025
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वासुदेव घाट पर करेंगे उगते सूर्य को अर्घ्य, सनातन आस्था के महापर्व में सम्मिलित होंगे नई दिल्ली हरीश रावत रिधि दर्पण ! सनातन धर्म और पूर्वांचल की आस्था

वासुदेव घाट पर करेंगे उगते सूर्य को अर्घ्य, सनातन आस्था के महापर्व में सम्मिलित होंगे

नई दिल्ली हरीश रावत रिधि दर्पण !

सनातन धर्म और पूर्वांचल की आस्था से जुड़ा महापर्व छठ पूजा इस बार और भी ऐतिहासिक होने जा रहा है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 28 अक्टूबर को दिल्ली के प्रसिद्ध वासुदेव घाट पर छठ महापर्व के अवसर पर पूजा-अर्चना करेंगे और उगते हुए सूर्य को नमन करेंगे।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री के आगमन की सूचना मिलते ही दिल्ली प्रशासन, पुलिस, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और सुरक्षा एजेंसियों ने तेजी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। घाट की सफाई, सजावट और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष इंतज़ाम किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की पुष्टि होते ही संबंधित विभागों ने दिन-रात तैयारी शुरू कर दी है।इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूरी दिल्ली कैबिनेट के भी उपस्थित रहने की संभावना है। उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा पहले ही घाट का निरीक्षण कर चुके हैं।छठ पूजा भारत के सनातन धर्म में अडिग आस्था, तपस्या और प्रकृति पूजन का प्रतीक पर्व माना जाता है। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की आराधना की जाती है। श्रद्धालु निर्जला व्रत रखकर अस्ताचलगामी और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस पर्व में शुद्धता, संयम और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।प्रधानमंत्री का इस महापर्व में सम्मिलित होना पूरे देश में आस्था और सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। राजनीतिक और धार्मिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल पूर्वांचल वासियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि सनातन संस्कृति के प्रति प्रधानमंत्री की गहरी श्रद्धा को भी दर्शाता है।छठ पर्व की पूर्व संध्या पर घाटों पर लाखों श्रद्धालु एकत्रित होंगे। दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन ने भी ट्रैफिक और व्यवस्था को लेकर विशेष योजना बनाई है ताकि प्रधानमंत्री की उपस्थिति में छठ पूजा का आयोजन शांतिपूर्ण और भव्य ढंग से संपन्न हो सके।यह पर्व सूर्य उपासना और प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है।चार दिन तक चलने वाले इस पर्व में शुद्धता, आत्मसंयम और आस्था की पराकाष्ठा दिखाई देती है।श्रद्धालु मिट्टी के घाटों पर दीप जलाकर सूर्य और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना करते हैं।इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें उगते और डूबते दोनों सूर्य की पूजा की जाती है — जो जीवन के संतुलन और कृतज्ञता का प्रतीक है।

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