January 15, 2026
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छठ महापर्व: सूर्य उपासना और प्रकृति से जुड़ा सनातन आस्था का उत्सव

  • October 26, 2025
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दिल्ली में तैयारी चरम पर — डॉ. राकेश रमन झा ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को अवकाश घोषित करने पर जताया आभार हरि सिंह रावत रिधि दर्पण। छठ पूजा,

दिल्ली में तैयारी चरम पर — डॉ. राकेश रमन झा ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को अवकाश घोषित करने पर जताया आभार

छठ पूजा, पूर्वांचलवासियों का आस्था, शुद्धता और आत्मसंयम से जुड़ा महापर्व, इस वर्ष भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व न केवल भारत में बल्कि संसार के लगभग 172 देशों में मनाया जाता है, जहाँ प्रवासी पूर्वांचलवासी अपने घर-परिवार और मातृभूमि की परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं।

दिल्ली सरकार द्वारा राजधानी में 1000 से अधिक छठ घाटों की तैयारी की गई है, वहीं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी अपने स्तर पर घाटों का सौंदर्यीकरण कर श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित की है।

पूर्वी दिल्ली के ताहिरपुर स्थित वाटरबॉडी पार्क में पूर्वांचल मिथिलांचल जीवन ज्योति सेवा समिति द्वारा बीते 10 वर्षों से भव्य स्तर पर छठ पर्व का आयोजन किया जा रहा है। समिति के संस्थापक डॉ. राकेश रमन झा ने इस बार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा छठ महापर्व पर अवकाश घोषित किए जाने पर उनका आभार जताते हुए कहा —

“मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी ने पूर्वांचल की भावनाओं को सम्मान देते हुए जो निर्णय लिया है, वह दिल्ली की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व न केवल श्रद्धा का, बल्कि पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण का भी संदेश देता है।”
— डॉ. राकेश रमन झा, संस्थापक, पूर्वांचल मिथिलांचल जीवन ज्योति सेवा समिति

छठ पर्व: उगते और अस्ताचलगामी सूर्य को प्रणाम

छठ महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है —
नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य।
इस पर्व में व्रती महिलाएँ नदी या तालाब के जल में खड़ी होकर अस्ताचलगामी और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं।

यह संसार का एकमात्र पर्व है जिसमें सूर्य के दोनों रूपों — उगते और डूबते — का पूजन किया जाता है।
इस पूजा का उद्देश्य सूर्यदेव से ऊर्जा, स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करना है।


सनातन धर्म और छठ की मान्यता

छठ पूजा की परंपरा महाभारत काल से जुड़ी मानी जाती है। कहा जाता है कि द्रौपदी ने अपने पतियों की रक्षा और समृद्धि के लिए सूर्यदेव की आराधना की थी।
उसी आस्था की स्मृति में आज भी माताएँ और बहनें छठ मैया की पूजा करती हैं।

छठ मैया को ऊर्जा, स्वास्थ्य, संतान सुख और पर्यावरण की संरक्षिका माना जाता है।
सनातन परंपरा के अनुसार यह पर्व प्रकृति, पंचतत्व और जीवन संतुलन की साधना है।
सूर्यदेव एकमात्र साक्षात देवता हैं जिनका दर्शन प्रत्यक्ष रूप में किया जाता है।


छठ पर्व का हर अंश प्राकृतिक सामग्रियों से जुड़ा है —
संतरा, केला, नारियल, गन्ना, अदरक, हल्दी, सिंघाड़ा और ठेकुआ जैसी वस्तुएँ न केवल प्रसाद हैं बल्कि प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक भी हैं।
यह पर्व पर्यावरण स्वच्छता, जल संरक्षण और पौष्टिक आहार की प्रेरणा देता है।

वाटरबॉडी पार्क, ताहिरपुर में पिछले कई दिनों से छठ घाटों की सफाई और सजावट का कार्य चल रहा है।
सुनहरी लाल यादव, डॉ. चंद्रदीप, विजय वर्मा, राजदेव, सत्येंद्र कुमार, कृष्णकांत, सीटू कुमार, विनय तिवारी जैसे समाजसेवी लगातार व्यवस्था में जुटे हुए हैं।
वहीं, पुरानी सीमापुरी छठ पर्व आयोजन समिति के संस्थापक सुनील झा भी पिछले 25 वर्षों से छठ घाट की सफाई और पूजा आयोजन में सक्रिय हैं।

डॉ. झा ने बताया कि दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों के अधिकारी घाट निरीक्षण और सहयोग कार्यों में पूरी तत्परता से जुटे हुए हैं।

पर्व का प्रकार सूर्य उपासना और प्रकृति आराधना
अवधि 4 दिन (नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक)
प्रमुख स्थान यमुना घाट, कालिंदी कुंज, ताहिरपुर वाटरबॉडी पार्क, सीमापुरी
प्रसाद ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना, सूप में अर्घ्य
प्रमुख संदेश ऊर्जा, पवित्रता, पर्यावरण और संतुलन

डॉ. राकेश रमन झा का संदेश

“छठ महापर्व भारतीय संस्कृति की आत्मा है।
यह पर्व हमें सूर्यदेव के माध्यम से जीवन में प्रकाश, शुद्धता और संतुलन का महत्व सिखाता है।
दिल्ली की धरती पर यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं
बल्कि सामाजिक एकता, प्रकृति प्रेम और मातृशक्ति के सम्मान का उत्सव है

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