भैया दूज: भाई-बहन के अटूट प्रेम और संरक्षण का पवित्र पर्व
- October 23, 2025
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नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! सनातन धर्म की अमर परंपरा — यमराज और यमुना की कथा से जुड़ा स्नेह, सुरक्षा और समर्पण का संदेश दीपावली की
नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! सनातन धर्म की अमर परंपरा — यमराज और यमुना की कथा से जुड़ा स्नेह, सुरक्षा और समर्पण का संदेश दीपावली की
नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण !
सनातन धर्म की अमर परंपरा — यमराज और यमुना की कथा से जुड़ा स्नेह, सुरक्षा और समर्पण का संदेश
दीपावली की रोशनी के बाद जब घरों में स्नेह का उजाला बाकी रहता है, उसी मधुर वातावरण में आता है भैया दूज का पर्व — जो भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और संरक्षण की भावना का प्रतीक है।
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला यह पावन दिन भारतीय संस्कृति में परिवारिक एकता, सामाजिक संतुलन और नारी सम्मान की प्रेरणा देता है।
पौराणिक कथा — यमराज और यमुना का मिलन
सनातन धर्म के ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, सूर्यदेव की पत्नी छाया से उत्पन्न यमराज और यमुना सगे भाई-बहन थे।
कहा जाता है कि एक दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। यमुना ने अत्यंत हर्ष के साथ अपने भाई का स्वागत किया, अभ्यंग स्नान कराया, तिलक लगाया और भोजन कराया।
यमराज उसकी श्रद्धा और प्रेम से प्रसन्न होकर बोले —
“हे बहन! आज के दिन जो भी भाई अपनी बहन के घर आदरपूर्वक भोजन करेगा, वह दीर्घायु, निरोगी और यमलोक के भय से मुक्त रहेगा।”
उस दिन की तिथि कार्तिक शुक्ल द्वितीया थी, और तभी से यह पर्व “भैया दूज” या “यम द्वितीया” के नाम से मनाया जाने लगा।
सनातन धर्म का संदेश — हर पर्व में विज्ञान और मानवता का संगम
भैया दूज केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व वाला उत्सव है।
सनातन धर्म में हर परंपरा के पीछे मानव कल्याण, स्वास्थ्य और प्रकृति के संरक्षण का गूढ़ संदेश छिपा है।
बहन द्वारा भाई के मस्तक पर तिलक लगाने से आज्ञा चक्र सक्रिय होता है, जिससे मन में शांति, आत्मविश्वास और शुभ भाव उत्पन्न होता है
दीपक जलाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है, जो शुद्धता और सौहार्द का संकेत देती है
भाई का अपनी बहन के हाथ का भोजन करना प्रेम और विश्वास का प्रतीक है, जो परिवारिक संबंधों को और सशक्त बनाता है।
भैया दूज केवल बहन द्वारा भाई के लिए प्रार्थना का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई द्वारा बहन की सुरक्षा, सम्मान और स्नेह के वचन का दिन भी है।
यह पर्व समाज को यह सिखाता है कि नारी का आदर और संरक्षण ही सभ्यता का आधार है।

महंतों और धर्माचार्यों के अनुसार,
“सनातन धर्म में नारी को शक्ति का रूप माना गया है।
भैया दूज उसी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है।”
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तेज़ी से बदलती जीवनशैली में भी यह पर्व रिश्तों की आत्मीयता, पारिवारिक मूल्य और भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा देता है।
आज जब डिजिटल युग ने दूरियाँ बढ़ा दी हैं, भैया दूज हमें सिखाता है कि सच्चे रिश्ते दिल से निभाए जाते हैं, दूरी से नहीं मिटते।
भैया दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है।
यमराज और यमुना की कथा से जुड़ा पर्व।
भाई-बहन के स्नेह, प्रेम और रक्षा का प्रतीक।
तिलक और दीपक का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व।
सनातन धर्म में नारी सम्मान और पारिवारिक समरसता का संदेश।
आधुनिक समाज में रिश्तों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा।
“भाई-बहन का अटूट बंधन — भैया दूज पर बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाते हुए।”
(सांकेतिक चित्र: पारंपरिक वस्त्रों में बहन तिलक लगाते हुए, पास में जलता हुआ दीपक और मिठाई की थाली)
“भैया दूज का पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह सनातन धर्म की उस आध्यात्मिक भावना का प्रतीक है
जो परिवार, प्रेम, सम्मान और सेवा के माध्यम से मानवता को जोड़ती है।”
1 Comment
बहुत सुंदर