January 15, 2026
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गोवर्धन पर्व: भक्ति, विज्ञान और प्रकृति संरक्षण का वैश्विक संदेश

  • October 21, 2025
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भारत से विश्व तक — गोवर्धन पर्व का संदेश अरुण शर्मा रिधि दर्पण! दीपावली के अगले दिन मनाया जाने वाला गोवर्धन पर्व आज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं,

भारत से विश्व तक — गोवर्धन पर्व का संदेश

अरुण शर्मा रिधि दर्पण!

दीपावली के अगले दिन मनाया जाने वाला गोवर्धन पर्व आज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानवता, पर्यावरण और स्वास्थ्य के संतुलन का वैश्विक प्रतीक बन चुका है।
यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की वह दिव्य लीला याद दिलाता है जब उन्होंने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया।
इस घटना ने यह संदेश दिया कि प्रकृति ही सच्चा देवता है और उसका सम्मान ही मानव अस्तित्व की रक्षा कर सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संस्कृति के इस दृष्टिकोण को “Nature is our Mother, not a resource” के रूप में प्रस्तुत कर चुके हैं। उनका कहना है कि —

“भारत का हर पर्व हमें प्रकृति के साथ जुड़ने और उसे संरक्षित करने की प्रेरणा देता है। गोवर्धन पूजा इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।”


पौराणिक कथा और उसका संदेश

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जब ब्रजवासी प्रतिवर्ष इंद्र देव की पूजा करते थे, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि वर्षा का वास्तविक कारण इंद्र नहीं, बल्कि गोवर्धन पर्वत, गौमाता और पर्यावरण का संतुलन है।
जब इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलाधार वर्षा की, तब श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को आश्रय दिया।
इस घटना ने मानवता को यह शिक्षा दी कि प्रकृति से टकराने के बजाय उसके साथ सामंजस्य बनाना ही सच्ची बुद्धिमत्ता है।


लोग घरों में गोबर और मिट्टी से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाते हैं, जिसे फूलों और दीपों से सजाया जाता है।
विज्ञान बताता है कि गोबर में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और वायु-शुद्धिकरण गुण होते हैं, जो वातावरण को शुद्ध रखते हैं।

अन्नकूट — पोषण और पर्यावरण का संतुलन

इस दिन 56 भोग (छप्पन भोग) तैयार किए जाते हैं, जिनमें मौसमी अनाज, दालें और सब्ज़ियाँ शामिल होती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, यह भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और प्रकृति से तालमेल बनाता है।

गोवर्धन पर्व पर गौमाता की पूजा विशेष रूप से की जाती है। आयुर्वेद में गाय के पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र) को शरीर और मन की शुद्धि का प्राकृतिक औषधि माना गया है

भजन-कीर्तन और सामूहिक पूजा से सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है।
विज्ञान भी मानता है कि सामूहिक प्रार्थना और संगीत मानव मस्तिष्क में ऑक्सिटोसिन स्तर बढ़ाते हैं, जिससे शांति और एकता का भाव बढ़ता है।

गोवर्धन पर्व आज पर्यावरण संरक्षण और क्लाइमेट एक्शन से जुड़ी विश्वव्यापी चिंताओं से मेल खाता है।
यह पर्व हमें सिखाता है कि धरती, जल, वायु, वनस्पति और पशु – सभी का संरक्षण ही सतत विकास (Sustainable Development) की आधारशिला है।

प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में दिए अपने भाषण में कहा था —

“भारत के पर्व प्रकृति के प्रति हमारी आस्था का प्रमाण हैं। जब दुनिया जलवायु संकट से जूझ रही है, तब हमारे त्योहार हमें Lifestyle for Environment (LiFE) की प्रेरणा देते हैं।”


विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति का संदेश

आज जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) स्वच्छ हवा, जैविक खेती और प्राकृतिक जीवनशैली की वकालत कर रहे हैं,
भारत का यह पर्व उनकी दिशा को बल देता है।
गोवर्धन पूजा का संदेश है —
“प्रकृति से प्रेम करो, प्रदूषण से दूर रहो, और संतुलित जीवन जियो।”


पर्व का नाम गोवर्धन पूजा / अन्नकूट उत्सव
तिथि दीपावली के अगले दिन (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)
मुख्य आराध्य भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौमाता
धार्मिक दृष्टिकोण भक्ति, कृतज्ञता और ईश्वर की सर्वव्यापकता का प्रतीक
वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर्यावरण शुद्धिकरण, स्वास्थ्य संवर्धन और संतुलित जीवन
प्रधानमंत्री का संदेश “प्रकृति हमारी माता है — उसका संरक्षण ही मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।”

गोवर्धन पर्व न केवल भारत की धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह दुनिया को यह सिखाता है कि आध्यात्मिकता और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं।
यह पर्व पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और स्थायी जीवनशैली का वह आदर्श प्रस्तुत करता है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।

“गोवर्धन पर्व हमें याद दिलाता है कि जब मनुष्य प्रकृति को पूजता है, तब जीवन स्वयं ईश्वरमय हो जाता है।”

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