January 15, 2026
दिल्ली

स्वदेशी दीपावली का संदेश — “मिट्टी के दीये जलाएं, संस्कृति बचाएं, प्रकृति से नाता जोड़ें”

  • October 18, 2025
  • 0

@ नई दिल्ली :- दीपावली केवल रोशनी का पर्व नहीं, यह भारत की सनातन संस्कृति, स्वदेशी भावना और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। हमारे ऋषि-मुनियों ने

@ नई दिल्ली :-

आज जब पूरा देश “आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तो मिट्टी के दीयों को जलाना न केवल हमारी परंपरा का पालन है, बल्कि देश के कुम्हारों, ग्रामीण उद्योगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का माध्यम भी है।

मिट्टी के दीयों के लाभ:
ये पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते।
इससे ग्रामीण कारीगरों और कुम्हारों की आजीविका सुरक्षित होती है।
यह घी या सरसों के तेल से जलाए जाने पर वातावरण को शुद्ध करता है।
यह सनातन धर्म की उस परंपरा को जीवित रखता है, जिसमें प्रकाश अज्ञान के अंधकार को दूर करता है।

दीयों की रोशनी केवल घर नहीं जगमगाती, यह मन में सकारात्मकता और करुणा का दीप प्रज्वलित करती है। रासायनिक रंगों और प्लास्टिक की लाइटों से दूर रहकर जब हम मिट्टी का दीया जलाते हैं, तो धरती माता को धन्यवाद देते हैं क्योंकि यही धरती हमें जीवन देती है।

“मिट्टी का दीया जलाना कोई साधारण कर्म नहीं, यह संस्कृति, संवेदना और स्वावलंबन का संगम है।”
इस दीपावली पर आइए,
मिट्टी का दीया जलाएं स्वदेशी अपनाएं — भारत को आत्मनिर्भर बनाएं।

“जहां स्वदेशी का दीप जलता है, वहां राष्ट्र की आत्मा प्रज्वलित होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *