February 9, 2026
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हर दहेज शिकायत सच नहीं, निष्पक्ष जांच जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

  • January 19, 2026
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नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: अरुण शर्मादिल्ली हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामलों को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि हर दहेज का मामला स्वतः

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: अरुण शर्मा
दिल्ली हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामलों को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि हर दहेज का मामला स्वतः सत्य नहीं माना जा सकता, ऐसे मामलों में निष्पक्ष और गहन जांच अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का दुरुपयोग न केवल निर्दोष लोगों को परेशान करता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और सामाजिक संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने पारिवारिक विवाद और दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ससुराल पक्ष हर स्थिति में दोषी नहीं होता और कई मामलों में शिकायतकर्ता द्वारा कानून का गलत इस्तेमाल भी सामने आया है। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में भावनाओं के बजाय तथ्यों और सबूतों के आधार पर जांच होनी चाहिए।
कोर्ट के समक्ष यह तथ्य आया कि विवाह के कुछ वर्षों बाद महिला ने पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए, जबकि रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि वह लंबे समय तक स्वेच्छा से ससुराल से अलग रही और मध्यस्थता के दौरान लगातार आर्थिक मांगें रखती रही। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आपराधिक मुकदमे न्याय का उद्देश्य पूरा करने के बजाय दबाव बनाने का जरिया बन जाते हैं।


हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि दहेज कानूनों का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं की रक्षा करना है, न कि पारिवारिक विवादों को आपराधिक रंग देकर प्रतिशोध का माध्यम बनाना। अदालत ने पुलिस और निचली अदालतों को निर्देश दिया कि वे इस प्रकार के मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने और कार्रवाई से पहले सभी पहलुओं की सावधानीपूर्वक जांच करें।
अंततः हाईकोर्ट ने संबंधित मामले में पति और ससुराल पक्ष को सभी आरोपों से राहत देते हुए कहा कि न्याय तभी सार्थक है जब वह संतुलित, निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित हो। यह फैसला दहेज कानूनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है।

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