स्टैंडिंग कमेटी की मंजूरियों को दरकिनार किया जा रहा है: सत्या शर्मा
- December 6, 2025
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नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की बजट बैठक के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया, जब स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन सत्या शर्मा
नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की बजट बैठक के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया, जब स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन सत्या शर्मा
नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण !
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की बजट बैठक के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया, जब स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन सत्या शर्मा ने निगम आयुक्त अश्विनी कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि निगम प्रशासन अनेक बड़े प्रस्तावों को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने के बजाय सीधे सदन में रख रहा है, जो नियमों और निगम की पारंपरिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
सत्या शर्मा के अनुसार, अनेक “बड़े टिकट” प्रस्ताव—जिन्हें परंपरागत रूप से उच्च-स्तरीय स्टैंडिंग कमेटी की मंजूरी आवश्यक होती है—को हाउस में सीधे प्रशासनिक मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने इसे समिति की अधिकारिता कमजोर करने और पारदर्शिता के विरुद्ध कदम बताया।
प्रस्तावों को सीधे सदन में भेजना नियमों के विपरीत: सत्या शर्मा
शर्मा ने कहा कि प्रस्तावों की सूची समिति को भेजने में अनावश्यक देरी की जा रही है, जबकि इन प्रस्तावों पर वित्तीय मंजूरी समय पर मिल सकती थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्टैंडिंग कमेटी ही व्यय और प्रशासनिक स्वीकृतियों की मुख्य संस्था है, तो उसे दरकिनार कर सीधे सदन में प्रस्ताव क्यों भेजे जा रहे हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा:
“नियमों के अनुसार, आयुक्त केवल 5 लाख रुपये तक के प्रस्तावों को मंजूरी दे सकते हैं। इससे अधिक राशि वाले सभी प्रस्ताव समिति के माध्यम से ही पास होने चाहिए। लेकिन इस नियम का पालन लगातार नहीं हो रहा, जिससे समिति की भूमिका को कमजोर किया जा रहा है।”
निगम आयुक्त का जवाब – “हमने नियमों के अनुसार काम किया”
आयुक्त ने जवाब दिया कि वे दिल्ली नगर निगम अधिनियम के तहत कार्य कर रहे हैं और सभी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। उनका कहना था कि प्रस्तावों को समय पर सदन के एजेंडे में शामिल किया गया है और आवश्यकतानुसार समिति में चर्चा भी की जाएगी।
हालाँकि सत्या शर्मा इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि
“यदि सदन में प्रस्ताव पर कोई सुझाव जोड़ना हो तो समिति का काम है उसे अंतिम रूप देना। फिर प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे सदन में प्रस्ताव क्यों लाए जा रहे हैं?”
अन्य पार्षदों ने भी जताई नाराज़गी
भाजपा पार्षद राजपाल सिंह और आप पार्षद परवीन कुमार ने भी इसी मुद्दे पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा आवश्यक है, ताकि पार्षद अपने क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार सुझाव दे सकें।
सीनियर पार्षद मुकेश गोयल ने बजट को “अधूरा” करार देते हुए कहा कि
“टैक्स न बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन बजट में क्षेत्रीय विकास के लिए बहुत कम योजनाएँ हैं। तीन साल से विकास कार्य लगभग रुका हुआ है और जनता को मूलभूत सुविधाएँ तक नहीं मिल रही हैं।”
निष्कर्ष – पारदर्शिता और प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
यह पूरा विवाद इस बात का संकेत है कि निगम की आंतरिक प्रक्रियाओं को लेकर बड़ा असंतोष है। स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन से लेकर विभिन्न पार्षदों ने स्पष्ट कहा कि यदि नियमों को दरकिनार किया गया, तो निर्णयों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता दोनों प्रभावित होंगी।