March 2, 2026
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संस्कृत के प्रखंड विद्वान पंडित श्री गोपाल शर्मा शास्त्री का निधन सनातन परंपराओं के अनुरूप देव चरणों में विलीन हुई आत्मावरिष्ठ पत्रकार कृष्ण देव पाठक के पिता के निधन से शोक की लहर

  • December 20, 2025
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अरुण शर्मा नई दिल्ली।संस्कृत भाषा के प्रखंड विद्वान, ज्योतिषाचार्य एवं अंकशास्त्र के मर्मज्ञ पंडित श्री गोपाल शर्मा शास्त्री का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे

अरुण शर्मा

नई दिल्ली।संस्कृत भाषा के प्रखंड विद्वान, ज्योतिषाचार्य एवं अंकशास्त्र के मर्मज्ञ पंडित श्री गोपाल शर्मा शास्त्री का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण देव पाठक के पूज्य पिता थे। उनके निधन से न केवल परिवार, बल्कि पत्रकारिता जगत, शिक्षा क्षेत्र और सनातन संस्कृति से जुड़े समाज में गहरा शोक व्याप्त है।

परिवारिक सूत्रों के अनुसार पंडित श्री गोपाल शर्मा शास्त्री जी ने 18 दिसंबर 2025 को शांतिपूर्वक देह त्याग किया। उनके देहावसान को सनातन धर्म की परंपरा में देवलोक गमन माना गया। शास्त्रों के ज्ञाता होने के कारण उनका संपूर्ण जीवन धर्म, कर्म और संस्कारों से जुड़ा रहा और उनका अंतिम संस्कार भी पूर्णतः सनातन धर्म के वैदिक रीति–रिवाजों के अनुरूप संपन्न हुआ।

19 दिसंबर 2025 (शुक्रवार) को प्रातः 10 बजे उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली गई। “राम नाम सत्य है” के गगनभेदी उद्घोष के बीच शोकाकुल परिजनों, शिष्यों और समाज के गणमान्य लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। अंतिम यात्रा निगम बोध घाट पहुँची, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार, अग्नि संस्कार, पिंडदान एवं देव चरणों में समर्पण की भावना के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उपस्थित विद्वानों ने इसे एक सनातन संस्कारयुक्त विदाई बताते हुए कहा कि पंडित जी का जीवन और मृत्यु—दोनों ही शास्त्रसम्मत रहे।

पंडित श्री गोपाल शर्मा शास्त्री जी संस्कृत के गहन अध्येता होने के साथ–साथ ज्योतिष एवं अंकशास्त्र के प्रतिष्ठित विद्वान थे। उन्होंने अपने दीर्घ जीवनकाल में शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। राजकीय सर्वोदय विद्यालय से सेवानिवृत्ति के पश्चात भी वे विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े रहे तथा सनातन धर्म, वैदिक ज्ञान और भारतीय परंपराओं के प्रचार–प्रसार में संलग्न रहे।

उनका सरल स्वभाव, अनुशासित जीवनशैली और विद्वता उन्हें समाज में विशेष सम्मान दिलाती थी। शिष्य और परिचित उन्हें चलती–फिरती गुरुकुल परंपरा के रूप में स्मरण करते हैं। उनके मार्गदर्शन से अनेक विद्यार्थियों और साधकों ने संस्कृत एवं वैदिक ज्ञान को आत्मसात किया।

उनके निधन पर नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन, दिल्ली प्रदेश के उपाध्यक्ष अरुण शर्मा, वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों, धर्माचार्यों एवं सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया। शोक संवेदना प्रकट करते हुए कहा गया कि पंडित श्री गोपाल शर्मा शास्त्री जी का देहावसान सनातन धर्म, संस्कृत भाषा और भारतीय वैदिक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है।

दिवंगत आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना की जा रही है तथा शोकाकुल परिवार, विशेषकर वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण देव पाठक जी को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की जा रही है।

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