February 27, 2026
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वरदान’ से वैश्विक संदेश: अंगदान–देहदान बना मानवता, विज्ञान और चिकित्सा शिक्षा का महाअभियान

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रिधि दर्पण/अरुण शर्मापूर्वी दिल्ली विश्वास नगर। दधीचि देहदान समिति द्वारा आयोजित ‘वरदान’ फिल्म फेस्टिवल ने अंगदान और देहदान जैसे संवेदनशील विषय को केवल सामाजिक नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य

रिधि दर्पण/अरुण शर्मा
पूर्वी दिल्ली विश्वास नगर। दधीचि देहदान समिति द्वारा आयोजित ‘वरदान’ फिल्म फेस्टिवल ने अंगदान और देहदान जैसे संवेदनशील विषय को केवल सामाजिक नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य विमर्श का केंद्र बना दिया। यह आयोजन कला, विज्ञान, चिकित्सा शिक्षा और मानवीय मूल्यों का अद्वितीय संगम साबित हुआ।
इस अभियान के सूत्रधार और दधीचि देहदान समिति के संरक्षक Alok Kumar ने अपने विस्तृत संदेश में कहा,
“देहदान मानवता की अंतिम सेवा है। जब एक शरीर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए समर्पित होता है, तब वह हजारों भावी डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को जीवन बचाने की शक्ति देता है। यह केवल दान नहीं, बल्कि विज्ञान और समाज के भविष्य में निवेश है।”
समिति के अध्यक्ष Mahesh Pant और वरिष्ठ कार्यकर्ता Sudhir Gupta ने भी देहदान को चिकित्सा शिक्षा की रीढ़ बताते हुए कहा कि आधुनिक मेडिकल साइंस में एनाटॉमी, सर्जरी, न्यूरोसाइंस और ट्रांसप्लांट रिसर्च के लिए दान की गई देहें अमूल्य हैं।


अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य परिप्रेक्ष्य में अंगदान क्यों जरूरी?
विश्व स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार हर वर्ष लाखों मरीज अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में रहते हैं।
हृदय, यकृत, गुर्दा, फेफड़े और कॉर्निया जैसे अंग प्रत्यारोपण से जीवन बचाया जा सकता है।
मेडिकल विश्वविद्यालयों में एनाटॉमी लैब में देहदान से छात्रों को वास्तविक मानव शरीर की संरचना समझने का अवसर मिलता है।
रिसर्च आधारित चिकित्सा शिक्षा में देहदान नई उपचार पद्धतियों और सर्जिकल तकनीकों के विकास का आधार बनता है।


इसी संदर्भ में इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के कुलपति Mahesh Verma ने कहा कि “यदि हमें वैश्विक स्तर की चिकित्सा शिक्षा देनी है, तो देहदान के प्रति सामाजिक स्वीकृति और जागरूकता बढ़ाना अनिवार्य है।”
प्रधानमंत्री का संदेश: जनआंदोलन की दिशा
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ‘मन की बात’ में अंगदान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा है कि “एक व्यक्ति का निर्णय कई जिंदगियों में प्रकाश भर सकता है।” कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रधानमंत्री के इसी संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व की सहभागिता
दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने भावनात्मक शब्दों में कहा कि उनका परिवार स्वयं अंगदान का संकल्प ले चुका है, और यह समाज के लिए प्रेरणा का विषय होना चाहिए।
केंद्रीय राज्य मंत्री Harsh Malhotra ने इसे “जीवन से जीवन जोड़ने का महादान” बताते हुए राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता जताई।
विशिष्ट उपस्थिति और विचार
कार्यक्रम में अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह, पार्षद मुकेश रीना महेश्वरी, युवा नेता मुकेश महेश्वरी, पार्षद चंद्र प्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार सौरभ भटनागर, फिल्म निर्देशक करण समर्थ, भाजपा दिलशाद गार्डन मंडल के उपाध्यक्ष दीपक सागर, मंडल अध्यक्ष सिंह, युवा मोर्चा अध्यक्ष शैंकी खुराना सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।
फिल्म निर्देशक करण समर्थ ने कहा कि “सिनेमा के माध्यम से यदि अंगदान का संदेश वैश्विक मंच तक पहुंचे, तो यह मानवता के लिए सबसे बड़ी पटकथा होगी।”
विज्ञान, समाज और सेवा का संगम
‘वरदान’ फिल्म फेस्टिवल ने स्पष्ट कर दिया कि अंगदान और देहदान केवल धार्मिक या भावनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि वैज्ञानिक आवश्यकता और मानवीय दायित्व है।
यह चिकित्सा छात्रों के लिए ज्ञान का स्रोत है।
यह वैज्ञानिक अनुसंधान का आधार है।
यह अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती का स्तंभ है।
और सबसे बढ़कर, यह मानवता की निरंतरता का प्रतीक है।
दधीचि देहदान समिति के नेतृत्व में यह अभियान अब स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुका है। ‘वरदान’ सचमुच वह सेतु बन गया है, जो शरीर से परे जाकर जीवन, विज्ञान और मानवता को जोड़ता है।

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