March 21, 2026
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रसोई गैस संकट से बुझते चूल्हे, महंगाई की मार से टूटती रोज़ी-रोटी — कब जागेगा प्रशासन?”

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एलपीजी की कमी से होटल-रेस्टोरेंट बेहाल, उद्योग ठप — गरीब तबके पर दोहरी मार पूर्वी दिल्ली, विशेष संवाददाता अरुण शर्मापूर्वी दिल्ली। रसोई गैस (एलपीजी) की लगातार बढ़ती कमी

एलपीजी की कमी से होटल-रेस्टोरेंट बेहाल, उद्योग ठप — गरीब तबके पर दोहरी मार

पूर्वी दिल्ली, विशेष संवाददाता अरुण शर्मा
पूर्वी दिल्ली। रसोई गैस (एलपीजी) की लगातार बढ़ती कमी अब सिर्फ एक आपूर्ति संकट नहीं रही, बल्कि यह रोज़गार, महंगाई और आम आदमी की जिंदगी पर सीधा प्रहार बन चुकी है। हालात ऐसे हैं कि होटल-रेस्टोरेंट से लेकर छोटे उद्योगों तक, हर क्षेत्र इस संकट की चपेट में है।
सबसे ज्यादा असर खानपान के व्यवसाय पर देखा जा रहा है। कई रेस्टोरेंट और होटलों को अपने मेन्यू में 40% तक कटौती करनी पड़ी है, जबकि कुछ ने तो लंच सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी है। इससे न सिर्फ कारोबार प्रभावित हुआ है, बल्कि यहां काम करने वाले कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी संकट गहराने लगा है।


रेस्टोरेंट से सड़क तक: हर जगह असर
एलपीजी की कमी ने छोटे ढाबों, रेडी-पटरी वालों और ठेला व्यवसायियों की कमर तोड़ दी है।
जहां एक तरफ रेडी-पटरी का रोजगार समाप्ति की कगार पर है, वहीं दूसरी ओर खाने-पीने की चीजों की कीमतों में कई गुना इजाफा हो चुका है।
एक दुकानदार का कहना है, “गैस नहीं मिलेगी तो चूल्हा कैसे जलेगा? और चूल्हा नहीं जलेगा तो घर कैसे चलेगा?”
उद्योगों पर भी पड़ा गहरा असर
यह संकट सिर्फ होटल उद्योग तक सीमित नहीं है।
प्लास्टिक निर्माण
वायरिंग और पॉलिथीन
पॉलिमर उत्पादन
फुटवियर उद्योग
सभी क्षेत्रों में कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत ने उत्पादन को प्रभावित किया है। इससे बाजार में सामान की कमी और कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।
वैश्विक कारणों से गहराया संकट
विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण हैं—
Russia-Ukraine War के कारण वैश्विक आपूर्ति बाधित
रूस पर लगाए गए प्रतिबंध
उत्पादन में कमी और तकनीकी समस्याएं
बढ़ती वैश्विक मांग
इन सभी कारणों ने मिलकर एलपीजी की उपलब्धता को प्रभावित किया है।
महंगाई और बेरोजगारी का डबल अटैक
एलपीजी संकट ने मुद्रास्फीति को और बढ़ा दिया है।
खाने-पीने की चीजें महंगी
छोटे व्यवसाय बंद होने की कगार पर
मजदूरों और कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में
इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है, जो पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहा है।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
ऐसे समय में जब जनता महंगाई और रोज़गार के संकट से जूझ रही है, सवाल उठ रहे हैं कि—
क्या सरकार इस संकट को समय रहते नियंत्रित कर पाएगी?
क्या गरीब तबके को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
रसोई गैस की कमी अब सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक संकट बनती जा रही है।
अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर और गहरा हो सकता है।
“चूल्हे की आग ठंडी पड़ी तो सिर्फ खाना नहीं, उम्मीदें भी बुझ जाएंगी।”

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