January 15, 2026
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यमुना पार के मसीहा: रामबाबू शर्मा, जो देह नहीं रहे पर जनसेवा में अमर हैं विशेष श्रद्धांजलि

  • January 2, 2026
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@नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण !  दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, नगर विधानसभा से विधायक और निगम पार्षद से लेकर संगठन के सर्वोच्च प्रदेशीय पद तक

@नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! 

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, नगर विधानसभा से विधायक और निगम पार्षद से लेकर संगठन के सर्वोच्च प्रदेशीय पद तक का प्रेरक सफर तय करने वाले रामबाबू शर्मा आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका व्यक्तित्व, उनका संघर्ष और उनकी जनसेवा दिल्ली की राजनीति में एक अमिट छाप छोड़ गया है।
रामबाबू शर्मा उन विरले नेताओं में शुमार थे, जिनकी राजनीति सत्ता के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि सेवा, संघर्ष और संवेदना के मूल्यों पर आधारित थी। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सार्वजनिक जीवन निरंतर विस्तार पाता गया। विशेष रूप से यमुना पार क्षेत्र में उनका जनाधार और प्रभाव जन-जन तक दिखाई देता था। यही कारण है कि वहां के लोग उन्हें स्नेह और सम्मान से “यमुना पार का मसीहा” कहा करते थे।


निगम पार्षद से विधायक और प्रदेश अध्यक्ष तक का प्रेरक सफर
रामबाबू शर्मा ने निगम पार्षद के रूप में जनता की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए जमीनी स्तर पर संघर्ष किया। विधायक के रूप में उन्होंने विधानसभा में जनहित से जुड़े मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाया। वहीं, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने संगठन को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का दायित्व पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ निभाया।
वे केवल पदों तक सीमित नेता नहीं थे, बल्कि कांग्रेस की विचारधारा के कर्मठ, समर्पित और जुझारू सिपाही थे, जिन्होंने न केवल दिल्ली बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी की पहचान को मजबूती देने में योगदान दिया।
हर दिल अजीज, सहज और संघर्षशील व्यक्तित्व
रामबाबू शर्मा की सबसे बड़ी पहचान उनका सरल स्वभाव और हर दिल अजीज व्यक्तित्व था। कार्यकर्ता हों या आम नागरिक—वे हर किसी की बात धैर्य से सुनते थे और हर समस्या को अपनी समस्या समझते थे। सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाकर चलना उनकी राजनीतिक परिपक्वता का प्रमाण था।
अनिल गौतम का भावुक स्मरण
पूर्व निगम पार्षद एवं अधिवक्ता अनिल गौतम ने उन्हें स्मरण करते हुए कहा—
“रामबाबू शर्मा जैसे नेता आज की राजनीति में विरले हैं। उन्होंने पूरी ज़िंदगी कांग्रेस की विचारधारा और जनसेवा को समर्पित कर दी। वे हमारे लिए केवल नेता नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थे।”
देह नहीं रही, पर विचार अमर हैं


रामबाबू शर्मा आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी जनसेवा, उनका संघर्ष और उनका सादगी भरा नेतृत्व आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। दिल्ली की राजनीति में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन बना रहेगा।

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