January 15, 2026
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मृत्यु के बाद भी जीवन का संकल्प — सुधीर गुप्ता का अनोखा जन्मदिवस देहदान से जीवनदान और स्वदेशी से आत्मनिर्भरता का संदेश

  • October 19, 2025
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@रिधि दर्पण संवादाता ! नई दिल्ली।दधीचि देह दान समिति के उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता ने अपने जन्मदिवस को समाजसेवा के एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में मनाया। उन्होंने राजधानी

@रिधि दर्पण संवादाता !

नई दिल्ली।
दधीचि देह दान समिति के उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता ने अपने जन्मदिवस को समाजसेवा के एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में मनाया। उन्होंने राजधानी दिल्ली के स्लम इलाकों में जाकर लोगों को अंगदान और देहदान के महत्व से अवगत कराया और कहा —

“मनुष्य का शरीर मृत्यु के बाद भी किसी अन्य के जीवन को खुशहाल बना सकता है। इसलिए हमें मृत्यु के पश्चात भी अच्छे कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए।”

सुधीर गुप्ता ने कहा कि देहदान और अंगदान न केवल मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक है, बल्कि यह वह पुण्य कार्य है जो किसी अंधकारमय जीवन में नई रोशनी भर सकता है। उन्होंने बताया कि दधीचि देह दान समिति समाज में फैले अंधविश्वासों को दूर करने और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने के लिए देश और विदेश — दोनों स्तरों पर जागरूकता अभियान चला रही है।

उन्होंने कहा,

“हमारे सनातन धर्म और शास्त्रों में भी अंगदान का उल्लेख मिलता है। महर्षि दधीचि ने अपने शरीर का दान कर देवताओं को विजयी बनाया — वही भावना आज के युग में भी हमें प्रेरित करती है।”

अपने जन्मोत्सव के अवसर पर सुधीर गुप्ता ने लोगों को स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा —

“आत्मनिर्भर भारत तभी संभव है जब हम अपने देश में निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देंगे। दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाना और उपहार में भी यही स्वदेशी प्रतीक देना, सच्ची देशभक्ति है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वदेशी अपनाओ, आत्मनिर्भर बनो” के आह्वान को दोहराते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों का प्रयोग देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ गांवों और कारीगरों के जीवन में भी उजाला लाएगा।

सुधीर गुप्ता की यह पहल समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है —
एक ओर देहदान से जीवनदान का संदेश, तो दूसरी ओर स्वदेशी से आत्मनिर्भरता की राह।


नई दिल्ली।दधीचि देह दान समिति के उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता ने अपने जन्मदिवस को समाजसेवा के एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में मनाया। उन्होंने राजधानी दिल्ली के स्लम इलाकों में जाकर लोगों को अंगदान और देहदान के महत्व से अवगत कराया और कहा —> “मनुष्य का शरीर मृत्यु के बाद भी किसी अन्य के जीवन को खुशहाल बना सकता है। इसलिए हमें मृत्यु के पश्चात भी अच्छे कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए।”सुधीर गुप्ता ने कहा कि देहदान और अंगदान न केवल मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक है, बल्कि यह वह पुण्य कार्य है जो किसी अंधकारमय जीवन में नई रोशनी भर सकता है। उन्होंने बताया कि दधीचि देह दान समिति समाज में फैले अंधविश्वासों को दूर करने और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने के लिए देश और विदेश — दोनों स्तरों पर जागरूकता अभियान चला रही है।उन्होंने कहा,> “हमारे सनातन धर्म और शास्त्रों में भी अंगदान का उल्लेख मिलता है। महर्षि दधीचि ने अपने शरीर का दान कर देवताओं को विजयी बनाया — वही भावना आज के युग में भी हमें प्रेरित करती है।”अपने जन्मोत्सव के अवसर पर सुधीर गुप्ता ने लोगों को स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा —> “आत्मनिर्भर भारत तभी संभव है जब हम अपने देश में निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देंगे। दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाना और उपहार में भी यही स्वदेशी प्रतीक देना, सच्ची देशभक्ति है।”उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वदेशी अपनाओ, आत्मनिर्भर बनो” के आह्वान को दोहराते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों का प्रयोग देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ गांवों और कारीगरों के जीवन में भी उजाला लाएगा।सुधीर गुप्ता की यह पहल समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है —एक ओर देहदान से जीवनदान का संदेश, तो दूसरी ओर स्वदेशी से आत्मनिर्भरता की राह।

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