February 9, 2026
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मुनीश कुमार गौड़ एडवोकेट: “दिल्ली सरकार की श्रमिक कल्याणकारी नीतियां सामाजिक न्याय को जमीनी स्तर पर उतार रही हैं”

  • January 21, 2026
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नई दिल्ली | विशेष संवाददाता : अरुण शर्मादिल्ली सरकार द्वारा कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के लिए शुरू किया गया 120 घंटे का स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम केवल एक नीतिगत घोषणा नहीं,

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता : अरुण शर्मा
दिल्ली सरकार द्वारा कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के लिए शुरू किया गया 120 घंटे का स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम केवल एक नीतिगत घोषणा नहीं, बल्कि श्रमिक सशक्तिकरण की दिशा में सरकार के निरंतर, साहसिक और दूरदर्शी प्रयासों का ठोस प्रमाण है। देश के वरिष्ठ श्रम विशेषज्ञ, पूर्व श्रम कल्याण आयुक्त और वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट एवं दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता मुनीश कुमार गौड़ ने इस पहल को संवैधानिक मूल्यों से प्रेरित और सामाजिक न्याय की भावना को धरातल पर उतारने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है।


मुनीश कुमार गौड़ का कहना है कि दिल्ली सरकार दिन-प्रतिदिन श्रमिकों के हित में जिस प्रकार के निर्णय ले रही है, वे पारंपरिक कल्याणकारी सोच से आगे बढ़कर संरचनात्मक सुधारों की ओर संकेत करते हैं। उनके अनुसार, यह सरकार श्रमिकों को केवल अनुदान या राहत का पात्र नहीं मानती, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, कुशल और सम्मानजनक जीवन जीने वाला सशक्त नागरिक बनाने की स्पष्ट नीति के साथ आगे बढ़ रही है।
संविधान की भावना कोकेसा व्यवहार में उतारती सरकार
मुनीश कुमार गौड़ ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21, 23, 38, 39 और 43 में निहित सामाजिक व आर्थिक न्याय, गरिमापूर्ण जीवन, शोषण से मुक्ति और आजीविका की सुरक्षा की भावना—दिल्ली सरकार की वर्तमान श्रमिक कल्याणकारी नीतियों में व्यावहारिक रूप से दिखाई देती है।
उन्होंने कहा,
“तीन दशकों के प्रशासनिक अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए स्किल, स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा—तीनों का एक साथ मिलना अब तक दुर्लभ रहा है। दिल्ली सरकार ने इन तीनों स्तंभों को एक ही नीति ढांचे में जोड़ने का साहसिक प्रयास किया है।”
₹35 प्रति घंटा मजदूरी: संवेदनशीलता और व्यावहारिक सोच का उदाहरण
वरिष्ठ अधिवक्ता मुनीश कुमार गौड़ ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान ₹35 प्रति घंटा मजदूरी के प्रावधान को इस योजना की सबसे मजबूत कड़ी बताया।
उनका कहना है कि अब तक अधिकांश प्रशिक्षण योजनाओं की सबसे बड़ी कमजोरी यही रही है कि श्रमिकों को सीखने के दौरान आय से वंचित होना पड़ता है, जिससे वे योजनाओं से दूर रह जाते हैं।
उन्होंने कहा,
“यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि श्रमिकों का प्रशिक्षण उनके परिवार की आजीविका के विरुद्ध न जाए। यह निर्णय सरकार की जमीनी समझ, नीतिगत परिपक्वता और श्रमिकों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शाता है।”
रोजगार-योग्यता से सामाजिक स्थिरता तक
मुनीश कुमार गौड़ के अनुसार, 120 घंटे का संरचित प्रशिक्षण, उसके बाद मूल्यांकन और प्रमाणपत्र, न केवल श्रमिकों की रोजगार-योग्यता (Employability) बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें बेहतर मजदूरी, सुरक्षित कार्यस्थल और वैधानिक अधिकारों की स्पष्ट समझ भी प्रदान करेगा।
एक अधिवक्ता के रूप में वे इसे भविष्य में श्रम विवादों में कमी, औद्योगिक शांति और सामाजिक स्थिरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण निवेश मानते हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में स्पष्ट नीति संदेश
मुनीश कुमार गौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि श्रमिक केवल “लेबर फोर्स” नहीं, बल्कि विकास के सहभागी और राष्ट्र निर्माण की रीढ़ हैं।
यदि अगले तीन वर्षों में 1.20 लाख से अधिक कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पूरा होता है, तो यह योजना देश के अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श और अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।
कल्याण से सशक्तिकरण की ओर निर्णायक यात्रा
वरिष्ठ अधिवक्ता मुनीश कुमार गौड़ ने कहा कि दिल्ली सरकार की श्रमिक कल्याणकारी नीतियां अब स्पष्ट रूप से कल्याण से सशक्तिकरण (Welfare to Empowerment) की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं।
उन्होंने कहा,
“यदि इस योजना को निरंतर निगरानी, पारदर्शिता और ईमानदार क्रियान्वयन के साथ लागू किया गया, तो यह दिल्ली के श्रम इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगी और श्रमिकों व उनके परिवारों के जीवन स्तर में वास्तविक, स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाएगी।”

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