January 15, 2026
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मुआवज़ा मिलने के बाद थमी कानूनी लड़ाई: अस्पताल और डॉक्टर पर दर्ज FIR दिल्ली हाईकोर्ट ने की रद्द

  • December 13, 2025
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नई दिल्ली/ रिधि दर्पण अरुण शर्मा दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में शहर के एक निजी अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया

नई दिल्ली/ रिधि दर्पण अरुण शर्मा

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में शहर के एक निजी अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया है। मामला एक महिला मरीज से जुड़ा था, जिसके सी-सेक्शन ऑपरेशन के दौरान कथित तौर पर पेट के भीतर कॉटन मॉप छूट गया था। अदालत ने माना कि पीड़िता को मुआवज़ा मिल चुका है और वह आगे मुकदमा नहीं चलाना चाहती, ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।

हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) की रिपोर्ट को भी महत्वपूर्ण माना। डीएमसी की जांच में यह निष्कर्ष निकला कि डॉक्टर की ओर से कोई “घोर लापरवाही या आपराधिक स्तर की गैर-जिम्मेदारी” नहीं पाई गई, जिससे आपराधिक मुकदमा चलाया जा सके।

ऑपरेशन के बाद सामने आई चूक

मामले के अनुसार, महिला ने सी-सेक्शन सर्जरी के बाद पेट में गंभीर संक्रमण की शिकायत की थी। जांच में सामने आया कि ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किया गया कॉटन मॉप पेट के भीतर रह गया था, जिसे बाद में निकालना पड़ा और महिला को एक और सर्जरी से गुजरना पड़ा।

हाईकोर्ट की सख्त लेकिन संतुलित टिप्पणी

न्यायमूर्ति अमित महाजन ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पोस्ट-ऑपरेटिव प्रोटोकॉल का पालन किया गया, समय पर सर्जिकल सलाह ली गई और मरीज की स्थिति में सुधार भी हुआ। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि प्राथमिक सर्जरी के दौरान मॉप की गिनती में चूक हुई, जिसकी जिम्मेदारी ऑपरेटिंग सर्जन और नर्सिंग स्टाफ की संयुक्त रूप से बनती है।

आपराधिक मुकदमा नहीं, लेकिन जवाबदेही जरूरी

अदालत ने कहा कि यह घटना अनजाने में हुई और इसमें आपराधिक मंशा या गंभीर लापरवाही नहीं दिखती, इसलिए आपराधिक मुकदमा चलाना उचित नहीं होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि मरीज को हुई पीड़ा वास्तविक है और मेडिकल पेशेवरों से अत्यधिक सावधानी की अपेक्षा की जाती है।

मुआवज़ा और जुर्माना

पीड़िता को पहले ही 14 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जा चुका है और उसने अदालत के समक्ष कहा कि वह संतुष्ट है और आगे कार्यवाही नहीं चाहती। हाईकोर्ट ने राहत देते हुए अस्पताल और संबंधित गायनेकोलॉजिस्ट पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसे दिल्ली पुलिस शहीद निधि में जमा कराने का निर्देश दिया गया।

अहम संदेश

यह फैसला एक ओर जहां मरीजों के अधिकार और पीड़ा को स्वीकार करता है, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी देता है कि हर चिकित्सकीय चूक को आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि न्याय, करुणा और पेशेवर जिम्मेदारी—तीनों का समन्वय जरूरी है।

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