January 15, 2026
डिफेंस

भारतीय नौसेना पोत आईएनएस सह्याद्रि जापान के योकोसुका में बंदरगाह पर रुका

  • October 23, 2025
  • 0

@ नई दिल्ली :- भारतीय नौसेना पोत (आईएनएस) सह्याद्रि, जो स्वदेश निर्मित शिवालिक श्रेणी का गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट है, ने 16 से 18 अक्टूबर 2025 तक जेआईएमईएक्स-25

भारतीय नौसेना पोत (आईएनएस) सह्याद्रि, जो स्वदेश निर्मित शिवालिक श्रेणी का गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट है, ने 16 से 18 अक्टूबर 2025 तक जेआईएमईएक्स-25 (जापान-भारत समुद्री अभ्यास) के समुद्री चरण में भाग लिया और बंदरगाह चरण के लिए 21 अक्टूबर 2025 को जापान के योकोसुका में बंदरगाह पर रुका।

योकोसुका पहुँचने से पहले, आईएनएस सह्याद्रि और जेएमएसडीएफ पोत असाही, ओमी और पनडुब्बी जिनरयू ने जेआईएमईएक्स 25 के समुद्री चरण में भाग लिया। समुद्री चरण 8 में उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध और मिसाइल रक्षा अभ्यास शामिल थे, जिसमें उड़ान संचालन और चल रहे पुनःपूर्ति के माध्यम से अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाया गया।

जेआईएमईएक्स-25, दोनों नौसेनाओं के बीच मज़बूत और तेज़ी से बढ़ते संबंधों को रेखांकित करता है, जो 2014 में भारत और जापान के बीच स्थापित ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ का आधार हैं। यह साझेदारी हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। योकोसुका में बंदरगाह चरण के दौरान, आईएनएस सह्याद्री के चालक दल और भाग लेने वाली जेएमएसडीएफ इकाइयाँ कई पेशेवर और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में शामिल होंगी।

इन गतिविधियों में क्रॉस-डेक दौरे, सहयोगात्मक परिचालन योजना, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और सौहार्द एवं एकता को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त योग सत्र शामिल होगा। यह बंदरगाह यात्रा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जहाज की चल रही लंबी दूरी की तैनाती के दौरान एक महत्वपूर्ण जुड़ाव के रूप में भी कार्य करती है। 2012 में कमीशन किया गया, आईएनएस सह्याद्री स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी के प्रति भारत की बढ़ती रुचि और राष्ट्र के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण का प्रमाण है।

बहु-भूमिका वाले स्टील्थ फ्रिगेट ने विभिन्न परिचालन तैनाती, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यासों में भाग लिया है। भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी लंबे समय से बहुत मज़बूत रही है, जिसमें रक्षा और समुद्री सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया है। भारतीय नौसेना और जेएमएसडीएफ एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण के साथ इस बढ़ती साझेदारी में अग्रणी रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *