February 8, 2026
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बसंत पंचमी: ज्ञान, कला और प्रकृति का अद्भुत संगम

  • January 23, 2026
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विशेष लेख: रिधि दर्पणअरुण शर्मा माँ सरस्वती की पूजा: ज्ञान और कला की जननीनई दिल्ली: हर वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को हिंदू धर्मावलम्बियों के

विशेष लेख: रिधि दर्पणअरुण शर्मा

माँ सरस्वती की पूजा: ज्ञान और कला की जननी
नई दिल्ली: हर वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को हिंदू धर्मावलम्बियों के लिए बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जाता है। यह पर्व केवल ऋतु परिवर्तन का उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम है।
इस दिन हिन्दू धर्म में माँ सरस्वती की पूजा की जाती है, जिन्हें ज्ञान, संगीत और कला की जननी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन माँ सरस्वती की उपासना से व्यक्ति के ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है और जीवन में सफलता के द्वार खुलते हैं।
पूजा विधि और मंत्र


बसंत पंचमी पर घरों और मंदिरों में माँ सरस्वती की विशेष पूजा होती है। भक्तजन उनके चरणों में दीप, पुष्प और पीले वस्त्र अर्पित करते हैं और उच्चारित करते हैं:
“या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
इसके अलावा, पूजा के दौरान आमतौर पर उच्चारित किया जाने वाला मंत्र:
“या कुन्देन्दु तुषार हार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता,
सामान्यज्ञान प्रदान करों माता सरस्वती नमोऽस्तु ते।”
विशेष टिप: इस मंत्र का उच्चारण केवल ज्ञान की प्राप्ति के लिए ही नहीं, बल्कि मन को शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरने के लिए भी किया जाता है। घरों में पीले रंग की सजावट की जाती है, क्योंकि पीला रंग बसंत ऋतु और उज्ज्वलता का प्रतीक है।
प्रकृति और फसल का पर्व
बसंत पंचमी का संबंध केवल आध्यात्मिकता से ही नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और कृषि से भी जुड़ा हुआ है।
इस दिन धरती पर बसंत ऋतु की ठंडी और हल्की हवाएँ बहती हैं।
फूलों और सरसों की फसल लहलहाती है।
वातावरण में हरियाली और जीवन की ताजगी फैल जाती है।
इस दिन सरसों के खेतों में पीली सरसों की चमक वातावरण में आनंद और उल्लास भर देती है। यही कारण है कि इसे फसल और समृद्धि का पर्व भी कहा जाता है।
होली और बसंत पंचमी का संबंध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी और होली आपस में जुड़े हुए हैं।
बसंत पंचमी बसंत ऋतु का स्वागत करती है।
होली रंगों का उत्सव इसी ऋतु के अंत में मनाई जाती है।
बसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व होली में रंगों के प्रतीक के रूप में दिखाई देता है।
इस तरह बसंत पंचमी रंगों और उल्लास का आरंभ करती है।
संस्कृति, ज्ञान और प्रेरणा
बसंत पंचमी सिर्फ पूजा-पाठ का पर्व नहीं है। यह हमें याद दिलाती है कि:
ज्ञान और संस्कृति से परिपूर्ण व्यक्ति ही समाज और प्रकृति के कल्याण में योगदान दे सकता है।
यह पर्व जीवन में सृजनात्मकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश देता है।
आज जब हम माँ सरस्वती के चरणों में शीश नवाते हैं और मंत्र “या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता…” उच्चारित करते हैं, हम केवल आध्यात्मिक शक्ति नहीं प्राप्त करते, बल्कि प्रकृति और जीवन के प्रति जागरूकता, कला, संस्कृति और शिक्षा के महत्व को भी समझते हैं।
बसंत पंचमी हमें प्रेरित करती है कि हम जीवन में ज्ञान, सृजनात्मकता और प्रकृति के संतुलन को अपनाएँ।
संक्षेप में
बसंत पंचमी वह पावन अवसर है, जब हम माँ सरस्वती की उपासना, प्रकृति की सजीवता, पीले रंग की चमक और बसंत ऋतु की ठंडी हवाओं का अनुभव करते हैं। यह पर्व हमारी संस्कृति, हमारे ज्ञान और जीवन की समृद्धि का प्रतीक है।

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