March 2, 2026
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फॉरेंसिक पढ़ी थी… सबूत मिटाने निकली थी! लेकिन विज्ञान ही बन गया गवाह — जानिए गांधी विहार मर्डर की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी”

  • October 29, 2025
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हरीश रावत रिधि दर्पण ! दिल्ली के गांधी विहार की एक शांत गली में कुछ ही हफ्ते पहले ऐसी वारदात हुई जिसने दिल्ली पुलिस से लेकर फोरेंसिक एक्सपर्ट्स

हरीश रावत रिधि दर्पण !

दिल्ली के गांधी विहार की एक शांत गली में कुछ ही हफ्ते पहले ऐसी वारदात हुई जिसने दिल्ली पुलिस से लेकर फोरेंसिक एक्सपर्ट्स तक को हैरान कर दिया।
6 अक्टूबर की रात, जब मोहल्ले में सब सो रहे थे, चौथी मंजिल के एक फ्लैट में अचानक धमाका हुआ — आग की लपटें उठीं, और कुछ ही मिनटों में सब कुछ राख में बदल गया।
पहली नज़र में यह गैस सिलिंडर ब्लास्ट का हादसा लगा, लेकिन जब पुलिस ने तह तक पहुंचने की कोशिश की — तो सामने आई एक ऐसी कहानी, जिसमें प्यार, धोखा, ब्लैकमेल और साइंस—सब कुछ था।

ब्लास्ट नहीं, मर्डर था ये!

32 वर्षीय रामकेश मीणा — जो यूपीएससी की तैयारी कर रहा था — उस रात अपने ही कमरे में मौत की नींद सो गया।
लेकिन मौत किसी हादसे की नहीं, बल्कि उसकी अपनी ‘लिव-इन पार्टनर’ अमृता चौहान की साजिश की देन थी।
अमृता, जो मुरादाबाद की रहने वाली और फोरेंसिक साइंस में बीएससी की छात्रा थी, ने अपने पुराने प्रेमी सुमित कश्यप और उसके साथी संदीप कुमार के साथ मिलकर यह कत्ल रचा।

पुलिस की जांच में सामने आया कि अमृता ने पहले रामकेश का गला दबाकर हत्या की, फिर शव पर तेल और शराब डालकर आग लगा दी, ताकि यह सिलिंडर ब्लास्ट जैसा लगे।
संदीप, जो एलपीजी सिलिंडर डिस्ट्रीब्यूटर था, जानता था कि गैस लीक के बाद विस्फोट में कितना समय लगेगा।
उन्होंने गैस ऑन की, जाली से दरवाजा बंद किया और कुछ मिनटों बाद तेज धमाका हुआ — कमरा आग के गोले में बदल गया।

फॉरेंसिक की छात्रा ने सोचा – कोई पकड़ नहीं पाएगा!

अमृता को पूरा यकीन था कि उसने सबूत मिटा दिए हैं।
वो जानती थी कि कैसे “आग” सब कुछ खत्म कर सकती है — यही तो उसने पढ़ा था।
लेकिन विज्ञान को मात देना आसान नहीं था।
फोरेंसिक टीम ने शव के जलने के पैटर्न, कमरे की कालिख और जलने के कोनों को देखकर समझ लिया — यह सिलिंडर ब्लास्ट नहीं, बल्कि प्लान किया गया मर्डर है।

सीसीटीवी और मोबाइल लोकेशन ने खोल दिया राज

पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी खंगाले।
फुटेज में दिखा — दो नकाबपोश लड़के और एक लड़की, फ्लैट में घुसते हैं और कुछ देर बाद बाहर निकलते ही धमाका होता है।

मोबाइल लोकेशन ने पक्का कर दिया कि उस समय अमृता वहीं थी।
पूछताछ में पहले तो उसने सब कुछ नकारा, लेकिन डिजिटल सबूतों के आगे उसे झुकना पड़ा।
अंत में उसने कबूल किया — “हाँ, मैंने उसे मारा… उसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी थी।”

हार्ड डिस्क ने खोले राज

पुलिस ने जब अमृता के पास से बरामद हार्ड डिस्क की जांच की तो उसमें 15 अन्य महिलाओं के निजी वीडियो मिले।
अमृता ने बताया — रामकेश उसे ब्लैकमेल कर रहा था।
वो उसकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो डिलीट करने से मना करता था।
गुस्से औ
डर में उसने अपने एक्स-बॉयफ्रेंड सुमित और उसके साथी के साथ मिलकर रामकेश को खत्म करने का फैसला कर लिया।

पुलिस बोली – विज्ञान ने अपराधी को बेनकाब कर दिया
डीसीपी राजा बंठिया ने कहा,

हमारे पास पर्याप्त डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्य हैं जो हत्या को साबित करते हैं। यह केस दिखाता है कि साइंस केवल अपराध में नहीं, अपराधी को पकड़ने में भी सबसे बड़ा हथियार है।”

21 साल की उम्र, पर साजिश इतनी ठंडी

सिर्फ 21 साल की उम्र में अमृता ने ऐसा अपराध किया, जो किसी क्राइम सीरीज़ की स्क्रिप्ट से कम नहीं।
वो सोचती थी कि उसने सबूत मिटा दिए, लेकिन विज्ञान और तकनीक ने साजिश की हर परत उधेड़ दी।
अब अमृता, सुमित और संदीप — तीनों सलाखों के पीछे हैं।
और गांधी विहार का वह फ्लैट आज भी खामोश है… जहाँ एक वक्त “प्यार” था, वहां अब बस धुएं की गंध और एक अनकही चीख बाकी है।

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