फुटपाथ नहीं, राहत की छत मौजूद एम्स–सफदरजंग के पास CRPF आश्रय बना देशभर से आए मरीजों का सहारा
- January 2, 2026
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@नई दिल्ली हरि सिंह रावत रिधि दर्पण ! देश के कोने-कोने से इलाज की आस लेकर दिल्ली आने वाले सैकड़ों मरीज और उनके तीमारदार आज भी एम्स और
@नई दिल्ली हरि सिंह रावत रिधि दर्पण ! देश के कोने-कोने से इलाज की आस लेकर दिल्ली आने वाले सैकड़ों मरीज और उनके तीमारदार आज भी एम्स और
@नई दिल्ली हरि सिंह रावत रिधि दर्पण !
देश के कोने-कोने से इलाज की आस लेकर दिल्ली आने वाले सैकड़ों मरीज और उनके तीमारदार आज भी एम्स और सफदरजंग अस्पताल के बाहर फुटपाथों पर रातें गुजारने को मजबूर हैं, जबकि कुछ ही दूरी पर एम्स और सीआरपीएफ के सहयोग से संचालित सुरक्षित आश्रय स्थल उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। विडंबना यह है कि यह संकट सुविधा के अभाव का नहीं, बल्कि जानकारी की कमी का है।

हर दिन विश्व स्तरीय अस्पताल एम्स दिल्ली और सफदरजंग अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाज से पहले रहने की व्यवस्था बन जाती है। आसपास के होटल और धर्मशालाएं आम मरीजों की पहुंच से बाहर हैं। मजबूरी में मरीजों के परिजन कड़कती सर्दी, बारिश और असुरक्षा के बीच अस्पताल के बाहर खुले आसमान के नीचे सोने को विवश हो जाते हैं।
CRPF और एम्स विश्राम सदन: राहत की छत
एम्स से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित विश्राम सदन, जिसे एम्स संचालित करता है, तथा सीआरपीएफ के सहयोग से बना आश्रय स्थल, लंबे इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। यहां सुरक्षित कमरे, बिस्तर, स्वच्छ वातावरण और भोजन की सुविधा उपलब्ध है।
विश्राम सदन में रहने वाली सेहनाज़, जिनकी बेटी का कैंसर का इलाज एम्स में चल रहा है, बताती हैं,
“बच्चे के इलाज के साथ यह चिंता कि रात कहां बिताएंगे, बहुत भारी पड़ती है। यहां आकर हमें सुकून मिला है। अब पूरा ध्यान इलाज पर है।”
जानकारी न होने से फुटपाथ पर मजबूरी
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से आए एक पिता, जो अपने एक साल के बेटे के दिल के इलाज के लिए एम्स पहुंचे थे, कहते हैं कि उन्हें इन सुविधाओं की जानकारी ही नहीं थी।
“हमें लगा था बाहर ही रहना पड़ेगा। डॉक्टर ने CRPF समर्थित आश्रय के बारे में बताया, तब जाकर राहत मिली,” उन्होंने कहा।
बिहार के पूर्णिया से आए मोहम्मद गुफरान, जो अपने पिता के इलाज के लिए दिल्ली आते हैं, मानते हैं कि यह सुविधा उनके लिए जीवनरेखा है।
“लंबा इलाज हो तो खर्च बहुत बढ़ जाता है। यह जगह हमारे जैसे लोगों के लिए बहुत बड़ा सहारा है,” उन्होंने कहा।
एम्स मीडिया सेल का बयान
एम्स दिल्ली की मीडिया सेल प्रभारी प्रो. रीमा दादा ने कहा कि समस्या व्यवस्थाओं की नहीं, बल्कि जागरूकता की है।
उन्होंने बताया,
“एम्स विश्राम सदन और सीआरपीएफ समर्थित आश्रयों के माध्यम से मरीजों और तीमारदारों को ठहरने की सुविधा देता है। डॉक्टर की सिफारिश पर लंबे इलाज वाले मरीज यहां रह सकते हैं। एम्स बिलासपुर से रेफर होकर आए मरीज भी इन सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।”
मानवता की मिसाल
देश के सबसे बड़े और विश्वस्तरीय अस्पताल एम्स और सफदरजंग के साथ सीआरपीएफ कैंप द्वारा संचालित यह आश्रय व्यवस्था उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जो गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि यह जानकारी हर मरीज और उसके परिजन तक पहुंचे, ताकि कोई भी मजबूरी में फुटपाथ पर रात न बिताए।