March 15, 2026
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‘दृष्टि का मूक चोर’ ग्लूकोमा पर चेतावनी — शीघ्र पहचान और नियमित जांच से ही बच सकती है

  • March 11, 2026
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@नई दिल्ली, देश में तेजी से बढ़ती ग्लूकोमा (काला मोतिया) की समस्या को लेकर प्रमुख नेत्र विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है और लोगों से नियमित नेत्र

@नई दिल्ली,

देश में तेजी से बढ़ती ग्लूकोमा (काला मोतिया) की समस्या को लेकर प्रमुख नेत्र विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है और लोगों से नियमित नेत्र जांच, शीघ्र पहचान और अधिक जन-जागरूकता की अपील की है।
वैश्विक बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी AbbVie ने World Glaucoma Week के अवसर पर #DefeatGlaucoma राष्ट्रीय मीडिया कॉन्क्लेव का आयोजन India Habitat Centre, नई दिल्ली में किया। कार्यक्रम में देश के अग्रणी नेत्र विशेषज्ञों ने चेताया कि ग्लूकोमा दुनिया में अपरिवर्तनीय अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर जांच और उपचार से इस बीमारी से होने वाली स्थायी दृष्टि हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।


भारत में ग्लूकोमा की गंभीर स्थिति
भारत में लगभग 1.2 करोड़ लोग ग्लूकोमा से प्रभावित
करीब 90% मामलों का अभी तक निदान नहीं हुआ
बीमारी शुरुआती चरण में बिना लक्षण के बढ़ती है
देर से पहचान होने पर स्थायी दृष्टि हानि का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति एक बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है, जिसके समाधान के लिए सरकार, डॉक्टरों और समाज के संयुक्त प्रयास जरूरी हैं।
विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण संदेश
डॉ. सुनीता दुबे
(ग्लूकोमा सेवाओं की प्रमुख, Dr. Shroff Charity Eye Hospital)
“ग्लूकोमा अक्सर बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ता है। कई मरीजों को तब तक पता नहीं चलता जब तक दृष्टि को अपरिवर्तनीय नुकसान न हो जाए। इसलिए 40 वर्ष के बाद नियमित नेत्र जांच बेहद जरूरी है।”
डॉ. हर्ष कुमार
(मोतियाबिंद एवं ग्लूकोमा विशेषज्ञ, Centre for Sight)
“ऑप्टिक तंत्रिका की जांच और इंट्राओक्युलर प्रेशर की नियमित माप से ग्लूकोमा का समय पर पता लगाया जा सकता है। जल्दी निदान होने पर रोग की प्रगति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है।”
डॉ. रमनजीत सिहोता
(ग्लूकोमा विशेषज्ञ, Shroff Eye Centre)
“ग्लूकोमा का उपचार एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। मरीजों को जीवन भर निगरानी और उपचार का पालन करना पड़ता है। जागरूकता ही इस बीमारी से होने वाले अंधेपन को रोकने का सबसे बड़ा उपाय है।”
डॉ. देवेन तुली


(ग्लूकोमा विशेषज्ञ, Netram Eye Foundation)
“ग्लूकोमा से लड़ने के लिए चिकित्सकों, नीति-निर्माताओं और समाज को मिलकर काम करना होगा। स्क्रीनिंग और उपचार सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना बेहद जरूरी है।”
कार्यक्रम की विशेष पहल
कॉन्क्लेव की शुरुआत “ग्लूकोमा विज़न एक्सपीरियंस डेमॉन्स्ट्रेशन” से हुई, जिसमें पत्रकारों और प्रतिभागियों को यह अनुभव कराया गया कि इस बीमारी में परिधीय दृष्टि (Peripheral Vision) किस प्रकार धीरे-धीरे कम हो जाती है।
इस अनुभव ने उपस्थित लोगों को शीघ्र जांच की आवश्यकता का प्रत्यक्ष एहसास कराया।
ग्लूकोमा क्या है?
ग्लूकोमा (काला मोतिया) एक दीर्घकालिक नेत्र रोग है जिसमें अक्सर आंख के अंदर का दबाव (Intraocular Pressure) बढ़ने से ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है।
प्रमुख तथ्य
धीरे-धीरे विकसित होने वाली बीमारी
शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं
परिधीय दृष्टि पहले प्रभावित होती है
समय पर उपचार न मिलने पर स्थायी अंधापन संभव
बचाव कैसे करें
40 वर्ष के बाद नियमित नेत्र जांच
परिवार में इतिहास होने पर विशेष सावधानी
समय पर डॉक्टर की सलाह और उपचार
आंखों के दबाव की नियमित जांच
कंपनी का उद्देश्य
AbbVie ने कहा कि वह पिछले कई दशकों से नेत्र स्वास्थ्य, ऑन्कोलॉजी, इम्यूनोलॉजी और न्यूरोसाइंस जैसे क्षेत्रों में नवोन्मेषी दवाओं और उपचार समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि मरीजों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सके।
संदेश स्पष्ट:
नियमित नेत्र जांच, शीघ्र पहचान और समय पर उपचार से ग्लूकोमा से होने वाली स्थायी दृष्टि हानि को रोका जा सकता है।

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