January 15, 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: खुले जेलों में बंदियों को मोबाइल फोन की अनुमति मिलेगी, बनेगी नई SOP

  • November 3, 2025
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नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय देते हुए कहा है कि खुले जेलों (ओपन जेल) में रह रहे कैदियों

नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण !

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय देते हुए कहा है कि खुले जेलों (ओपन जेल) में रह रहे कैदियों को अब मोबाइल फोन रखने की सशर्त अनुमति दी जानी चाहिए। अदालत ने इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का आदेश डायरेक्टर जनरल (प्रिज़न्स) को दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा केवल खुले जेलों और अर्ध-खुले जेलों में रह रहे कैदियों को मिलेगी, ताकि वे समाज में पुनर्वास के दौरान अपने कार्य और परिवार से सीमित संपर्क बनाए रख सकें।

आठ सप्ताह में तैयार हो नई व्यवस्था

हाईकोर्ट ने कहा कि जेल प्रशासन को आठ सप्ताह के भीतर SOP तैयार करनी होगी, जिसमें यह तय किया जाए कि

किन कैदियों को मोबाइल रखने की अनुमति मिलेगी,

फोन के उपयोग की समय-सीमा क्या होगी,

और किन परिस्थितियों में यह अनुमति रद्द की जा सकेगी।

कोर्ट ने आदेश दिया कि मोबाइल फोन की अनुमति सुरक्षा और अनुशासन के सख्त नियमों के साथ दी जाए ताकि इसका दुरुपयोग न हो।

यह आदेश जस्टिस रेखा पल्ली की बेंच ने उस याचिका पर दिया जिसमें एक बंदी ने कहा था कि वह खुले जेल से बाहर जाकर काम करता है और जेल प्रशासन से संपर्क में रहने के लिए मोबाइल की आवश्यकता है।

कोर्ट ने माना कि वर्तमान समय में तकनीक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, और बंदियों के पुनर्वास में इसका उपयोग सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

क्या है ओपन जेल?
ओपन जेल वे सुधार गृह होते हैं, जहां सजा पूरी कर रहे कैदियों को अनुशासन और अच्छे व्यवहार के आधार पर सीमित स्वतंत्रता दी जाती है। वे जेल परिसर के बाहर काम कर सकते हैं और शाम को लौटना अनिवार्य होता है।

क्यों जरूरी है SOP?
मोबाइल के गलत उपयोग को रोकने, जेल सुरक्षा बनाए रखने और कैदियों के पुनर्वास को संतुलित करने के लिए SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) जरूरी है। इसमें सभी नियम, निगरानी व्यवस्था और दंड प्रावधान तय होंगे।

क्या बदलेगा इस फैसले से?

खुले जेलों में कैदियों को सीमित रूप से मोबाइल फोन की सुविधा मिलेगी।

परिवार और समाज से संपर्क बनाए रखना आसान होगा।

पुनर्वास और सुधार की प्रक्रिया को नया आयाम मिलेगा।

“सुधार की राह पर चल रहे बंदियों को समाज से जोड़ना ही असली न्याय है।”

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