“वरिष्ठ पत्रकार व सीएम मीडिया सलाहकार समिति अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह की पहल पर आयोजित बैठक, मदन मोहन सती की भी उपस्थिति”
उत्तराखंड सरकार की मुख्यमंत्री मीडिया सलाहकार समिति के नव नियुक्त अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रो. गोविंद सिंह के व्यक्तिगत आमंत्रण पर आज दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन के सम्मेलन कक्ष में राजधानी में सक्रिय उत्तराखंड मूल के कई वरिष्ठ पत्रकारों, वेब पोर्टल प्रतिनिधियों, पत्रिकाओं और क्षेत्रीय अखबारों के संपादकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक मदन मोहन सती भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
इस बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार प्रो. गोविंद सिंह ने की, जिन्होंने पत्रकारिता में अपने चार दशकों से अधिक के समृद्ध अनुभव के साथ उत्तराखंड के हित में मीडिया से जुड़ी समस्याओं को सरकार के समक्ष रखने का बीड़ा उठाया। उन्होंने कहा कि इस संवाद का मूल उद्देश्य उत्तराखंड सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री तक दिल्ली में कार्यरत उन छोटे व मझोले समाचार पत्रों और डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों की समस्याओं को पहुँचाना है, जो वर्षों से राष्ट्रीय राजधानी में रहते हुए उत्तराखंड से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को समर्पित भाव से कवर कर रहे हैं।
प्रो. सिंह ने स्वीकार किया कि वर्तमान में उत्तराखंड में मीडिया विज्ञापनों की स्थिति बेहद जटिल और चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि राज्य में इस समय 1400 से अधिक समाचार पत्र डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म कार्यरत हैं और लगभग 3000 नए आवेदन पंजीकरण और एम्पैनलमेंट के लिए प्रक्रियाधीन हैं।
पत्रकारों ने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि उत्तराखंड बनने के 25 वर्षों के बाद पहली बार किसी अधिकारी ने दिल्ली में सक्रिय उत्तराखंडी पत्रकारों को आमंत्रित कर संवाद किया है। पत्रकारों ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री जब दिल्ली आते हैं तो वहां के पत्रकारों से संवाद करते हैं, उन्हें सम्मान देते हैं, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने कभी भी ऐसा प्रयास नहीं किया जिससे दिल्ली के पत्रकारों को आत्मसम्मान और सहयोग मिल सके।
बैठक में उपस्थित पत्रकारों ने यह भी शिकायत की कि जहां उत्तराखंड में क्षेत्रीय समाचार पत्रों और पोर्टलों को हर वर्ष लाखों रुपये के विज्ञापन मिलते हैं, वहीं दिल्ली में उत्तराखंड के मुद्दों को उजागर करने वाले पोर्टलों, वेबसाइट्स और पत्रिकाओं को पूरी तरह से उपेक्षित किया जाता है।
पत्रकारों की मुख्य मांगें रहीं:
एम्पैनलमेंट प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
दिल्ली में कार्यरत वेब पोर्टलों और अखबारों को भी राज्य स्तर पर मान्यता और विज्ञापन मिले।
एक मजबूत नीति बनाई जाए जिससे पत्रकारिता के इस महत्वपूर्ण स्तंभ को जीवित रखा जा सके।
प्रो. गोविंद सिंह ने पत्रकारों को आश्वस्त किया कि वे सभी सुझाव और समस्याएं मुख्यमंत्री और संबंधित उच्चाधिकारियों तक पहुंचाएंगे और ऐसी नीति बनाने की सिफारिश करेंगे जिससे दिल्ली में उत्तराखंड के लिए काम करने वाले पत्रकारों को भी समान अवसर और सम्मान मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे संवादात्मक कार्यक्रम और भी आयोजित किए जाएंगे ताकि दिल्ली में सक्रिय उत्तराखंडी मीडिया से सतत संपर्क बना रहे।
बैठक में उपस्थित प्रमुख पत्रकारों में शामिल थे:
सुनील नेगी, व्योमेश जुगरान, हरीश रावत अमर चंद, विनोद ढोंढियाल, श्रीमती सुषमा जुगरान ध्यानी, महेंद्र बोरा, दीप सिलोड़ी, सत्येन्द्र सिंह रावत, नीरज जोशी, हरिद्वार सिंह रावत, सीबी टम्टा, उषा नेगी, किशोर चंद थपलियाल, योगेन्द्र सिंह बिष्ट आदि।
सभी पत्रकारों ने अपने सुझाव साझा किए और मांग की कि छोटे समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और डिजिटल मीडिया को मजबूत करने हेतु ठोस कदम उठाए जाएं।
यह संवाद न केवल एक स्वागत योग्य पहल रही बल्कि उत्तराखंड सरकार और मीडिया के बीच एक नये सेतु निर्माण का संकेत भी है, जिससे भविष्य में पारदर्शिता, सहयोग और पत्रकारिता के हित में ठोस नीतियों की आशा की जा सकती है।