दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में हर दिन बदलेगी बेडशीट
- November 20, 2025
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केंद्र सरकार की पहल पर लागू हुई नई कलर–कोडेड व्यवस्था** नई दिल्ली हरि सिंह रावत रिधि दर्पण। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अब अधिक स्वच्छ और
केंद्र सरकार की पहल पर लागू हुई नई कलर–कोडेड व्यवस्था** नई दिल्ली हरि सिंह रावत रिधि दर्पण। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अब अधिक स्वच्छ और
केंद्र सरकार की पहल पर लागू हुई नई कलर–कोडेड व्यवस्था**
नई दिल्ली हरि सिंह रावत रिधि दर्पण।
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अब अधिक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा। केंद्र सरकार की पहल पर अस्पतालों में रोज़ाना बेडशीट बदलने की व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके तहत सप्ताह के हर दिन बेडशीट अलग–अलग रंगों में बदलने का नियम निर्धारित किया गया है, ताकि साफ-सफाई की पारदर्शिता बनी रहे और संक्रमण नियंत्रण को बढ़ावा मिले।
सप्ताह के सात दिन — सात रंग की बेडशीट
नए कलर कोड के अनुसार अस्पतालों में इस प्रकार बेडशीट बदली जाएँगी—
सोमवार — व्हाइट (सफेद)
मंगलवार — पिंक (गुलाबी)
बुधवार — ग्रीन (हरा)
गुरुवार — पर्पल (बैंगनी)
शुक्रवार — ब्लू (नीला)
शनिवार — लाइट ग्रे (हल्का ग्रे)
रविवार — पीच (आड़ू रंग)

इस व्यवस्था से न केवल साफ-सफाई में सुधार होगा, बल्कि यह सुनिश्चित रहेगा कि किसी भी दिन की बेडशीट पहचानने में आसानी हो और संक्रमण नियंत्रण अधिक मजबूत हो सके।
साफ-सफाई को लेकर सख्त निर्देश
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार अस्पतालों को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि—
संक्रमित और गंदे कपड़ों को अन्य कपड़ों से अलग सुरक्षित कंटेनर में रखा जाए।
सभी गंदे कपड़ों को गर्म पानी में डिटर्जेंट से धोया जाए।
कपड़ों को अस्पताल के भीतर और बाहर सुरक्षित तरीके से ट्रांसपोर्ट किया जाए।
धुलाई और सुखाने की प्रक्रिया संक्रमण-रोधी मानकों के अनुसार की जाए।
अधिकारियों का कहना है कि इस प्रणाली के लागू होने से अस्पतालों में साफ-सफाई की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। मरीजों और उनके परिजनों के बीच अस्पताल की स्वच्छता को लेकर सकारात्मक संदेश जाएगा।
स्टाफ की जिम्मेदारी भी बढ़ी
नई व्यवस्था में नर्सिंग स्टाफ और हाउसकीपिंग टीम की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर दिन तय रंग की बेडशीट ही इस्तेमाल की जाए और पुराने कपड़ों को तुरंत निर्धारित तरीके से एकत्र कर सफाई प्रक्रिया में भेजा जाए।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह कदम संक्रमण फैलने की संभावनाओं को कम करेगा और मरीजों को साफ-सुथरा वातावरण उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाएगा।