दिल्ली के अस्पतालों में ‘सस्ती क्वॉलिटी’ का खेल !
- December 6, 2025
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हरि सिंह रावत रिधि दर्पण। ICU ब्लॉकों में घटिया दरवाज़ों की सप्लाई—करोड़ों की परियोजना में भ्रष्टाचार की बू, PWD एक्शन में नई दिल्ली। राजधानी में स्वास्थ्य सुविधाओं को
हरि सिंह रावत रिधि दर्पण। ICU ब्लॉकों में घटिया दरवाज़ों की सप्लाई—करोड़ों की परियोजना में भ्रष्टाचार की बू, PWD एक्शन में नई दिल्ली। राजधानी में स्वास्थ्य सुविधाओं को
हरि सिंह रावत रिधि दर्पण।
ICU ब्लॉकों में घटिया दरवाज़ों की सप्लाई—करोड़ों की परियोजना में भ्रष्टाचार की बू, PWD एक्शन में
नई दिल्ली। राजधानी में स्वास्थ्य सुविधाओं को मज़बूत करने के नाम पर चल रही करोड़ों की परियोजनाओं में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली सरकार के 7 नए ICU अस्पताल ब्लॉकों के लिए सप्लाई किए गए दरवाज़ों में घटिया क्वॉलिटी पकड़ी गई है। निरीक्षण में सामने आई लापरवाही इतनी गंभीर है कि यह सीधे–सीधे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा पैदा करती है और करोड़ों की परियोजना पर भ्रष्टाचार का बड़ा सवाल खड़ा करती है।

PWD की तकनीकी टीम ने जांच के दौरान पाया कि ICU के लिए अनिवार्य हॉस्पिटल-ग्रेड स्टेनलेस स्टील की जगह सस्ते, कमजोर और नॉन-स्टैंडर्ड मेटल के दरवाजे लगाए जा रहे थे।
ये दरवाज़े
न वॉटरप्रूफ,
न फायर-रेज़िस्टेंट
और न ही ICU की सुरक्षा मानकों के अनुसार थे।
जांच रिपोर्ट सामने आते ही विभाग ने सप्लाई रोकते हुए संबंधित एजेंसी पर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।
करोड़ों का प्रोजेक्ट, लेकिन “सस्ते दरवाज़ों” से हुआ शक
दिल्ली की बढ़ती आबादी और स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए सरकार राजधानी में जल्द ही 7 नए ICU अस्पताल ब्लॉक शुरू करने जा रही है। निर्माण कार्य शालीमार बाग, , गुरु तेग बहादुर अस्पताल, रत्तन लाल अस्पताल, कस्तूरबा नगर, किराड़ी, सरिता विहार और रघुवीर नगर सहित कई अस्पतालों में तेज़ी से चल रहा है।
तभी सबसे पहले शिकायत आई—दरवाज़ों की क्वॉलिटी ICU के मानकों से मेल नहीं खा रही।
PWD के अनुसार शिकायत सही निकली—माल असली नहीं था, लेकिन बिल असली क्वॉलिटी का पास करवाया गया था।
यानी “ऊपर से क्वॉलिटी, नीचे से क्वांटिटी”—पूरा खेल मुनाफाखोरी का!
गंभीर खुलासा: असली दाम—सस्ता माल!
जांच में यह तथ्य सामने आया:
एजेंसी ने उच्च क्वॉलिटी का बिल बनाया,
लेकिन थर्ड-ग्रेड दरवाज़े सप्लाई किए।
फ्रेम और हार्डवेयर में भारी कटौती की गई।
ICU के लिए जरूरी सेफ्टी स्टैंडर्ड पूरी तरह अनदेखी कर दी गई।
PWD ने तुरंत सप्लाई रोकते हुए कंपनी को नोटिस जारी कर दिया और कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया।
सख़्त कार्रवाई—एजेंसी ब्लैकलिस्ट होने की कगार पर
PWD ने साफ कहा है कि ICU जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में घटिया सामग्री किसी भी सूरत में मंज़ूर नहीं है।
सरकारी निर्देशों के अनुसार—
सभी अस्पतालों में लगाए गए दरवाज़ों की दोबारा जांच होगी।
सप्लाई चेन में जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी।
मिलीभगत पाए जाने पर आपराधिक कार्रवाई होगी।
मरीजों की जान से खिलवाड़—विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि ICU में दरवाज़े सिर्फ दरवाज़े नहीं होते—वे
संक्रमण नियंत्रण,
एयर प्रेशर
और सुरक्षा
के अहम हिस्से होते हैं।
कमज़ोर और सस्ते मेटल का इस्तेमाल ICU की सम्पूर्ण सेफ्टी को खतरे में डाल सकता है।
यह सिर्फ लापरवाही नहीं—मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
इन अस्पतालों में बन रहे हैं नए ICU ब्लॉक—बेड संख्या सहित
अस्पताल ICU बेड संख्या
शालीमार बाग 1430 बेड
किराड़ी 458 बेड
सुल्तानपुरी 525 बेड
चाचा नेहरू अस्पताल 610 बेड
गुरु तेग बहादुर अस्पताल 1912 बेड
सरिता विहार 336 बेड
रघुवीर नगर 1565 बेड
इनमें से कई अस्पतालों में ICU का काम अंतिम चरण में था, तभी यह बड़ा घोटाला पकड़ में आया।
कहानी अभी खत्म नहीं—घोटाले की और परतें खुलने की उम्मीद
PWD का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर
गलत बिलिंग,
फर्जी सप्लाई
और कई स्तरों पर मिलीभगत
जैसे बड़े खुलासे और सामने आ सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार—
“यह अस्पताल निर्माण में अब तक की सबसे गंभीर लापरवाही है