January 15, 2026
दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली का पॉल्यूशन: स्वास्थ्य संकट और राजनीतिक टकराव के बीच फंसा देश का दिल

  • October 22, 2025
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नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों पॉल्यूशन के बढ़ते स्तर और इससे उत्पन्न स्वास्थ्य संकट की वजह से सुर्खियों में है।

हाल के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वायु प्रदूषण पिछले साल की तुलना में इस वर्ष और तेज़ी से बढ़ा है। पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों का स्तर WHO की तय सीमा से कई गुना ऊपर पहुंच गया है। परिणामस्वरूप, सांस की बीमारियों, एलर्जी, अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी परेशानियों में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर गंभीर स्वास्थ्य असर पड़ सकता है।

राजनीतिक टकराव:
इस गंभीर समस्या के बीच, दिल्ली की राजनीति अखाडा बन चुका है। आम आदमी पार्टी की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। दोनों पार्टियां पिछले वर्ष के आंकड़ों और नीतियों की तुलना करते हुए अपनी जिम्मेदारी साबित करने में जुटी हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पॉल्यूशन का मुद्दा केवल विवाद का विषय बनकर रह गया है, जबकि वास्तविक मकसद इसे कम करना होना चाहिए। “हवा में जहरीले तत्व लगातार बढ़ रहे हैं, और अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली का स्वास्थ्य तंत्र और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित होंगे,” वरिष्ठ पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अनुराग मेहरा ने कहा।

स्वास्थ्य और जीवन पर असर:
दिल्ली में प्रदूषण की मार सीधे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रही है। अस्पतालों में सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है, ICU और एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सुविधाओं पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह संकट राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन सकता है और अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण और स्वास्थ्य एजेंसियों की भी निगाह दिल्ली पर टिक गई है।

अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने दिल्ली के हालात को गंभीर बताया है। लगातार प्रदूषित हवा में रहने वाले लोग न केवल दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं, बल्कि यह शहर की आर्थिक उत्पादकता और वैश्विक छवि को भी प्रभावित कर रहा है।

समाधान की तलाश:
विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि समस्या का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं बल्कि ठोस नीति, प्रदूषण नियंत्रण और सार्वजनिक जागरूकता अभियान से ही संभव है। “सड़कों पर धूल नियंत्रण, वाहनों से निकलने वाले धुएं की निगरानी, औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्ती और हरित पहलू बढ़ाना अब समय की मांग है

दिल्ली की हवा इस समय चेतावनी की घंटी बजा रही है। यह केवल राजधानी का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे देश और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गया है।

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