February 10, 2026
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चतुर्थ सीईएस विद्या उत्सव 2026 : कक्षाओं से आगे बढ़कर भविष्य गढ़ने का संकल्प मानेकशॉ सेंटर में विद्या, विवेक और विकास का विराट संगम

  • February 9, 2026
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रिधि दर्पण/ अरुण शर्मा शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर अनुभव, कौशल और संस्कारों से जोड़ने का सशक्त संदेश लेकर चाइल्ड एजुकेशन सोसायटी (CES) द्वारा आयोजित

रिधि दर्पण/ अरुण शर्मा

शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर अनुभव, कौशल और संस्कारों से जोड़ने का सशक्त संदेश लेकर चाइल्ड एजुकेशन सोसायटी (CES) द्वारा आयोजित चतुर्थ सीईएस विद्या उत्सव–2026 का भव्य आयोजन दिल्ली छावनी स्थित मानेकशॉ सेंटर में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
यह उत्सव भारत के भविष्य—विद्यार्थियों और शिक्षकों को समर्पित एक अनूठा शैक्षिक महाकुंभ बनकर उभरा।
“विद्या उत्सव सिर्फ आयोजन नहीं, राष्ट्र के कर्णधारों का उत्सव है” — निखिल चानना
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर चाइल्ड एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष एवं बाल भारती पब्लिक स्कूलों के चेयरमैन निखिल चानना ने कहा कि
सीईएस की छत्रछाया में देशभर के 26 बाल भारती पब्लिक स्कूलों में 37,000 से अधिक विद्यार्थियों को 2,500 समर्पित शिक्षक शिक्षा दे रहे हैं।


उन्होंने बताया कि विद्या उत्सव की शुरुआत वर्ष 2023 में संस्था के स्थापना दिवस पर हुई थी और यह आयोजन अब शिक्षा नवाचार का एक सशक्त मंच बन चुका है।
पहला सत्र : “कक्षाओं से इतर भविष्य निर्माण” — अनुभवात्मक शिक्षा पर ज़ोर
आईएएस संजय कुमार ने नई शिक्षा नीति को बताया परिवर्तन की कुंजी
प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय कुमार रहे।
उन्होंने “कक्षाओं से इतर भविष्य निर्माण : वास्तविक संसार के कौशलों के दृष्टिकोण से अनुभवात्मक शिक्षा” विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।


उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
आज की शिक्षा केवल पढ़ना-लिखना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ‘शिक्षार्थी’ बनाना है।
नई शिक्षा नीति के सकारात्मक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक यदि उसके मूल तत्वों को समझ लें, तो विद्यार्थी अनुभव आधारित ज्ञान से जुड़ सकते हैं और वास्तविक जीवन के लिए तैयार हो सकते हैं।
शिक्षा, कौशल और एआई पर उच्चस्तरीय मंथन
राष्ट्रीय विशेषज्ञों की पैनल चर्चा बनी आकर्षण का केंद्र
इसी सत्र में सीईएस आईटी सलाहकार शरद अरोड़ा की मध्यस्थता में एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें—
डॉ. बुद्ध चंद्रशेखर (सीईओ, AICTE एवं अनुवादिनी AI)
सुश्री लक्ष्मी कौल (सार्वजनिक नीति एवं कौशल विशेषज्ञ)
डॉ. विन्नी जौहरी (माइक्रोसॉफ्ट एलिवेट, शिक्षा उद्योग निदेशक)
डॉ. बिस्वजीत साहा (निदेशक, कौशल शिक्षा, CBSE)
ने कौशल विकास, अनुभवात्मक शिक्षा, तकनीक और भविष्य की शिक्षा पर गहन विचार-विमर्श किया।
दूसरा सत्र : “विद्या, विवेक, विकास” — शिक्षा में भाव और दृष्टि की जरूरत
आशुतोष राणा ने सवाल उठाया : क्या हम बच्चों को केवल परीक्षा पास करा रहे हैं?
द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध अभिनेता और विचारक आशुतोष राणा रहे।
उन्होंने शिक्षा प्रणाली पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा कि—
आज की शिक्षा बच्चों को रटने तक सीमित कर रही है, जबकि शिक्षा का उद्देश्य भाव, विवेक और दृष्टि देना होना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि यदि वे अपनी रुचि को व्यवसाय बनाना चाहते हैं, तो उन्हें पाठ्यक्रम की सीमाओं से बाहर निकलकर विशद ज्ञान अर्जित करना होगा।
भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का संतुलन — बाल भारती मॉडल की सराहना
आशुतोष राणा ने निखिल चानना के नेतृत्व की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि
बाल भारती विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं का संस्कार भी दिया जा रहा है, जिससे विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे।
उन्होंने बाल भारती के शिक्षकवृंद को भी राष्ट्र निर्माण का सच्चा शिल्पकार बताया।
850 से अधिक गणमान्य अतिथि, 37,000 विद्यार्थी ऑनलाइन जुड़े
विद्या उत्सव बना शिक्षा का राष्ट्रीय मंच
कार्यक्रम में दिल्ली और एनसीआर की बाल भारती शाखाओं के प्रधानाचार्य, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी सहित लगभग 850 गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
वहीं देशभर की शाखाओं से 37,000 विद्यार्थी, उनके अभिभावक और परिवारजन ऑनलाइन माध्यम से इस शैक्षिक उत्सव के साक्षी बने।


संस्कृति, दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान के साथ समापन
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और विद्यार्थियों के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुआ।
समापन अवसर पर सीईएस के संयुक्त सचिव लक्षवीर सहगल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
चतुर्थ सीईएस विद्या उत्सव : शिक्षा को दिशा देने वाला ऐतिहासिक अध्याय
यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि
शिक्षा की नई सोच, अनुभवात्मक अधिगम और राष्ट्र निर्माण की ठोस पहल बनकर सामने आया।
चतुर्थ सीईएस विद्या उत्सव ने यह स्पष्ट कर दिया कि
भविष्य का भारत कक्षाओं से आगे जाकर गढ़ा जाएगा।

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