February 14, 2026
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ग्लोबल हेल्थकेयर में भारत की ऐतिहासिक छलांग: एम्स में विश्वस्तरीय फेस ट्रांसप्लांट की तैयारी, चिकित्सा विज्ञान में नया अध्याय

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नई दिल्ली रिधि दर्पण/ अरुण शर्मा भारत अब अत्याधुनिक पुनर्निर्माण सर्जरी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय

नई दिल्ली रिधि दर्पण/ अरुण शर्मा

भारत अब अत्याधुनिक पुनर्निर्माण सर्जरी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने फेस ट्रांसप्लांट (चेहरा प्रत्यारोपण) जैसी जटिल और विश्वस्तरीय सर्जरी की दिशा में निर्णायक तैयारी शुरू कर दी है। यह पहल न केवल भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए चिकित्सा विज्ञान में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
क्या है फेस ट्रांसप्लांट और क्यों है यह क्रांतिकारी?
फेस ट्रांसप्लांट एक उन्नत कम्पोज़िट टिश्यू एलोट्रांसप्लांटेशन (CTA) प्रक्रिया है, जिसमें किसी डोनर के चेहरे के हिस्से या पूर्ण संरचना को प्रत्यारोपित कर रोगी को नई कार्यक्षमता और पहचान दी जाती है।


मुख्य लाभ:
बोलने, खाने और सांस लेने की क्षमता में सुधार
दृष्टि सुरक्षा (ऑक्यूलर कम्पिटेंसी)
चेहरे की अभिव्यक्तियों की पुनर्स्थापना
दर्द से राहत और मानसिक आत्मविश्वास में वृद्धि
हाल ही में स्पेन में सफल फेस ट्रांसप्लांट ने इस तकनीक को एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। एम्स की यह पहल भारत को उसी वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
एम्स का बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी ब्लॉक: वैश्विक मानकों पर खरा
वर्ष 2021 में स्थापित एम्स का बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी ब्लॉक हर वर्ष:
250 से अधिक जटिल माइक्रोसर्जिकल पुनर्निर्माण सर्जरी
8000 से अधिक कुल शल्य क्रियाएं
एसिड अटैक और गंभीर जलन पीड़ितों के व्यापक पुनर्वास
यह अनुभव फेस ट्रांसप्लांट जैसी बहु-आयामी सर्जरी के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।
150 विशेषज्ञों की अंतर-विषयक टीम
फेस ट्रांसप्लांट के लिए एम्स में 150 से अधिक विशेषज्ञों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम तैयार की जा रही है, जिसमें शामिल हैं:
प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन
ईएनटी एवं मैक्सिलोफेशियल विशेषज्ञ
एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर टीम
इम्यूनोलॉजी एवं ट्रांसप्लांट मेडिसिन
नेफ्रोलॉजी, पैथोलॉजी
मनोरोग एवं पुनर्वास विशेषज्ञ
ऑर्गन ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन यूनिट
14–16 घंटे तक चलने वाली सर्जरी में नसों और रक्त वाहिकाओं का सूक्ष्म संयोजन सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती है। इसके साथ जीवनभर इम्यूनोसप्रेशन और रिजेक्शन का जोखिम भी जुड़ा रहता है।
वैश्विक सहयोग से कौशल संवर्धन
एम्स ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ अकादमिक सहयोग को मजबूत किया है। इंद्रनील सिन्हा (एसोसिएट प्रोफेसर, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल) के मार्गदर्शन में कैडेवरिक वर्कशॉप और हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
यह पहल भारतीय सर्जनों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ केंद्रों के समकक्ष दक्षता प्रदान कर रही है।
ऐतिहासिक विरासत से आधुनिक उपलब्धि तक
चेहरे के पुनर्निर्माण की आधुनिक नींव प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1917 की ‘बैटल ऑफ जटलैंड’ से जुड़ी मानी जाती है। वहीं भारत में प्राचीन काल में महर्षि सुश्रुत द्वारा वर्णित राइनोप्लास्टी आज भी प्लास्टिक सर्जरी के इतिहास में मील का पत्थर है।
एम्स की वर्तमान तैयारी उसी ऐतिहासिक परंपरा का आधुनिक विस्तार है।
भविष्य की रणनीति: वैश्विक हब बनने की ओर
एम्स ने:
संस्थागत प्रोटोकॉल विकास
एथिक्स एवं ट्रांसप्लांट कमेटी ढांचा
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
अनुसंधान एवं अकादमिक विस्तार
लाइसेंसिंग एवं नियामकीय तैयारी
पर काम तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यक्रम भारत को एशिया में फेस ट्रांसप्लांट के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है।


नई पहचान, नया आत्मविश्वास
फेस ट्रांसप्लांट केवल एक सर्जरी नहीं, बल्कि उन मरीजों के लिए नई जिंदगी है जिनके लिए पारंपरिक सर्जरी विकल्प विफल हो चुके हैं।
एम्स की यह पहल भारत को ग्लोबल हेल्थकेयर इनोवेशन के शीर्ष पर पहुंचाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
यदि यह परियोजना सफलतापूर्वक अमल में आती है, तो भारत न केवल चिकित्सा तकनीक में आत्मनिर्भर होगा, बल्कि विश्व स्वास्थ्य समुदाय में नेतृत्वकारी भूमिका भी निभाएगा।

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