January 15, 2026
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गुरु नानक देव जी — मानवता, समानता और सत्य के प्रकाश स्तंभ

  • November 6, 2025
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प्रकाश पर्व पर देशभर में कीर्तन, प्रभात फेरी और लंगर सेवा का आयोजन नई दिल्ली हरि सिंह रावत रिधि दर्पण। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशभर में

प्रकाश पर्व पर देशभर में कीर्तन, प्रभात फेरी और लंगर सेवा का आयोजन

नई दिल्ली हरि सिंह रावत रिधि दर्पण।


कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशभर में गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
यह दिन सिख समाज के साथ-साथ समस्त भारतवर्ष के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें समानता, सेवा और सत्य के आदर्शों की याद दिलाता है, जिन्हें गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन में आचरण के रूप में अपनाया था।

गुरु नानक देव जी का जीवन परिचय

गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी में रावी नदी के किनारे तलवंडी गाँव (वर्तमान पाकिस्तान के ननकाना साहिब) में हुआ था। उनके पिता का नाम मेहता कालू और माता का नाम माता तृप्ता देवी था।
बचपन से ही उनमें अध्यात्म, करुणा और ज्ञान के प्रति गहरी रुचि थी। वे बचपन से ही जात-पात, ऊँच-नीच और भेदभाव के विरोधी थे।

युवा अवस्था में उन्होंने समाज की अन्यायपूर्ण परंपराओं को चुनौती दी और समानता, एकेश्वरवाद और मानवता का संदेश दिया।
उनका प्रसिद्ध वाक्य था > “एक ओंकार सतनाम,करता पुरख, निर्भउ, निरंकार।”
अर्थात — ईश्वर एक ही है, जो सर्वशक्तिमान, निराकार और सर्वत्र विद्यमान है।

गुरु नानक जी की यात्राएँ और शिक्षाएँ

गुरु नानक देव जी ने अपने जीवनकाल में लगभग चार बड़े उदासियाँ (धार्मिक यात्राएँ) कीं, जिनके माध्यम से उन्होंने भारत, तिब्बत, अरब, श्रीलंका और फारस तक जाकर शांति, प्रेम और सेवा का संदेश फैलाया।
उनकी शिक्षाओं का मुख्य आधार तीन सिद्धांतों पर टिका है —

  1. नाम जपो — ईश्वर का स्मरण करो।
  2. किरत करो — ईमानदारी से जीवन यापन करो।
  3. वंड छको — अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दूसरों के साथ बाँटो।

उन्होंने कहा कि “न कोई ऊँचा, न कोई नीचा — सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं।”
उनकी शिक्षाएँ आज भी समाज में भाईचारा, समानता और सेवा की भावना जगाती हैं।

गुरु नानक पर्व का आयोजन

गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व उनके जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जो प्रायः कार्तिक पूर्णिमा के दिन पड़ता है।
इस दिन देश-विदेश के गुरुद्वारों में विशेष सजावट की जाती है।

सुबह-सुबह प्रभात फेरी निकाली जाती है, जिसमें श्रद्धालु “सतनाम श्री वाहेगुरु” के कीर्तन करते हुए नगर भ्रमण करते हैं।

गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ आयोजित किया जाता है, जो 48 घंटे तक चलता है।

शबद कीर्तन और गुरु का लंगर सभी के लिए खुले रूप में आयोजित किया जाता है, जहाँ बिना भेदभाव के सभी एक साथ भोजन करते हैं — यह समानता और सेवा का प्रतीक है।

रात को गुरुद्वारों में दीपमालाएँ और रंगीन रोशनियाँ की जाती हैं, जिससे वातावरण भक्ति और आनंद से भर उठता है।

गुरु नानक देव जी का संदेश केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी प्रतीक है।
उन्होंने उस युग में जातिवाद, अंधविश्वास और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और समाज को नई दिशा दी।
आज भी उनका संदेश समाज को यह सिखाता है कि सच्चा धर्म वही है जो सेवा, ईमानदारी और प्रेम में निहित हो।

गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व का सार यही है
“सबमें जोत, जोत में सब वही सच्चा सतनाम।”

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