February 9, 2026
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इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. महेश वर्मा ने पीएम मोदी के ‘स्वस्थ भारत, सुंदर भारत’ विजन के तहत दी ओरल हेल्थ पर जागरूकता

  • January 23, 2026
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रिधि दर्पण/ हरि सिंह रावत इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं मौलाना आज़ाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज़ (MAIDS) के पूर्व निदेशक प्रो. महेश वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के

रिधि दर्पण/ हरि सिंह रावत

इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं मौलाना आज़ाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज़ (MAIDS) के पूर्व निदेशक प्रो. महेश वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत, सुंदर भारत’ विजन को और मजबूत करते हुए दांतों और मुंह की सेहत के महत्व पर जोर दिया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में उन्होंने वैश्विक स्तर पर ओरल हेल्थ की अहमियत और इसके संबंध में स्वास्थ्य, उत्पादकता और चेहरे की सुंदरता पर गहन संदेश दिया।
कार्यक्रम में प्रो. महेश वर्मा ने छात्रों, फैकल्टी मेंबर्स, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, रोटरी क्लब के प्रतिनिधियों और मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज के प्रोफेशनल्स को संबोधित करते हुए कहा कि दांतों की देखभाल केवल चिकित्सा की जरूरत नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान, पोषण और सामाजिक गरिमा का मूल आधार है।
स्वस्थ मुस्कान, स्वस्थ राष्ट्र

प्रो. महेश वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का स्वास्थ्य दृष्टिकोण केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रिवेंशन, जागरूकता और जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी गई है।
“स्वस्थ राष्ट्र की शुरुआत स्वस्थ मुस्कानों से होती है। दांत सिर्फ खाने के औजार नहीं हैं—they चेहरे की बनावट तय करते हैं, व्यक्तित्व को उभारते हैं और समाज में आपकी पहचान बनाते हैं।”
उन्होंने चेताया कि यदि दांतों की बीमारियों की अनदेखी की गई तो यह देश की मानव पूंजी को कमजोर करती है, विशेषकर मजदूर, युवा और बुजुर्ग वर्ग में।


दांत: चेहरे की सुंदरता और आत्मविश्वास की कुंजी
वाइस-चांसलर ने कहा कि दांत चेहरे की मांसपेशियों को सहारा देते हैं। यदि दांत गिर जाएं तो चेहरे की बनावट बिगड़ती है, गाल में धंसापन आता है, आवाज़ प्रभावित होती है और आत्मविश्वास घटता है।
“चेहरे की सुंदरता सिर्फ कॉस्मेटिक नहीं होती। दांत चेहरे को संतुलित रखते हैं, बोलचाल में स्पष्टता लाते हैं और व्यक्तित्व को आत्मविश्वासी बनाते हैं। इनके बिना जीवन, कार्य और सामाजिक संबंध प्रभावित होते हैं।”
एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती
प्रो. महेश वर्मा ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ओरल डिजीज़ को दुनिया भर में सबसे व्यापक गैर-संचारी रोगों में शामिल किया है। उनका कहना था कि यह समस्या विशेषकर विकासशील देशों और श्रमिक वर्ग में अधिक प्रचलित है।
उन्होंने आगे कहा कि दांतों की अनदेखी से समानता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी असर पड़ता है, जिसे पूरी दुनिया अब रोकने के लिए प्रिवेंटिव स्ट्रेटेजीज़ अपना रही है।

विशेष संदेश: श्रमिकों और युवाओं के लिए
प्रो. महेश वर्मा ने छात्रों और कामकाजी वर्ग को चेताया कि दांतों की अनदेखी से पोषण संबंधी कमी, थकान, कार्यक्षमता में गिरावट और लंबी अवधि में मधुमेह, हृदय और पाचन रोग बढ़ सकते हैं।
“गिरे हुए दांतों को बदलना विलासिता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण और मानव गरिमा की आवश्यकता है।”
संपूर्ण भागीदारी से समाज जागरूक
कार्यक्रम में इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के सभी विभाग, स्टाफ, विभागाध्यक्ष, छात्राएं, रोटरी क्लब के सदस्य और मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज के पेशेवर शामिल हुए।
प्रो. महेश वर्मा ने कहा कि यह सहभागिता प्रधानमंत्री मोदी की जनता-केंद्रित स्वास्थ्य पहल की पहचान है, जहां शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य संस्थान और सामाजिक संगठन एक साथ जागरूकता फैलाने में काम कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर का संदेश
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कार्यक्रम में कहा कि प्रो. महेश वर्मा का यह संदेश न केवल भारत के लिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। दुनिया भर के देश ओरल हेल्थ को मुख्यधारा की स्वास्थ्य नीतियों में शामिल करने में संघर्ष कर रहे हैं।
प्रो. वर्मा ने निष्कर्ष देते हुए कहा,
“विश्वविद्यालयों को स्वास्थ्य के विचार नेताओं के रूप में सामने आना होगा। शिक्षा और जागरूकता ही बीमारियों के खिलाफ सबसे मजबूत टीका हैं।”
**प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत, सुंदर भारत’ विजन से लेकर प्रो. महेश वर्मा की ओरल हेल्थ जागरूकता तक, संदेश स्पष्ट है:

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