March 16, 2026
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आस्था, शक्ति और नवसृजन का महापर्व: चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू

  • March 16, 2026
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नौ दिनों तक होगी माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, घर-घर गूंजेगा “जय माता दी” विशेष संवाददाता: अरुण शर्मानई दिल्ली। सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि को शक्ति

नौ दिनों तक होगी माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, घर-घर गूंजेगा “जय माता दी”

विशेष संवाददाता: अरुण शर्मा
नई दिल्ली। सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि को शक्ति साधना, भक्ति और आत्मशुद्धि का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक नौ दिनों तक मनाया जाता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की पूजा की जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा पृथ्वी पर अपने भक्तों की रक्षा करने और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए विराजमान होती हैं। धर्माचार्यों के अनुसार चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है, इसलिए यह पर्व नई ऊर्जा, नई शुरुआत और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है।

देशभर के मंदिरों, शक्ति पीठों और घरों में इन दिनों विशेष पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।


तिथि और पंचांग के अनुसार नवरात्रि

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होती है और समापन राम नवमी के दिन होता है।

नवरात्रि का तिथि क्रम इस प्रकार है:

  • 19 मार्च – प्रतिपदा: घट स्थापना और माँ शैलपुत्री की पूजा
  • 20 मार्च – द्वितीया: माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा
  • 21 मार्च – तृतीया: माँ चंद्रघंटा की पूजा
  • 22 मार्च – चतुर्थी: माँ कूष्मांडा की पूजा
  • 23 मार्च – पंचमी: माँ स्कंदमाता की पूजा
  • 24 मार्च – षष्ठी: माँ कात्यायनी की पूजा
  • 25 मार्च – सप्तमी: माँ कालरात्रि की पूजा
  • 26 मार्च – अष्टमी: माँ महागौरी की पूजा
  • 27 मार्च – नवमी: माँ सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन

नवमी के दिन राम नवमी का पर्व भी मनाया जाता है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में प्रसिद्ध है।


नवरात्रि के 9 दिन – 9 देवी स्वरूप

चैत्र नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा को नवदुर्गा आराधना कहा जाता है।

  1. माँ शैलपुत्री – शक्ति और स्थिरता का प्रतीक
  2. माँ ब्रह्मचारिणी – तप और साधना की देवी
  3. माँ चंद्रघंटा – साहस और वीरता का स्वरूप
  4. माँ कूष्मांडा – सृष्टि की रचयिता
  5. माँ स्कंदमाता – मातृत्व और करुणा का रूप
  6. माँ कात्यायनी – पराक्रम और विजय की देवी
  7. माँ कालरात्रि – नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली
  8. माँ महागौरी – पवित्रता और सौभाग्य का प्रतीक
  9. माँ सिद्धिदात्री – सिद्धि और सफलता प्रदान करने वाली

दुर्गा मंत्र और उनका महत्व

नवरात्रि में देवी मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार मंत्र जाप से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है तथा नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

प्रमुख दुर्गा मंत्र:

सर्वसिद्धि मंत्र
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”

दुर्गा बीज मंत्र
“ॐ दुं दुर्गायै नमः”

देवी स्तुति मंत्र
“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”


पूजा विधि और घट स्थापना का महत्व

नवरात्रि का आरंभ घट स्थापना (कलश स्थापना) से होता है, जिसे शक्ति आराधना का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है।

पूजा विधि:

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें
  • चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें
  • मिट्टी के पात्र में जौ बोएं
  • कलश में जल भरकर आम के पत्ते और नारियल रखें
  • दीपक, धूप, फूल और नैवेद्य अर्पित करें
  • दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें
  • नौ दिनों तक सात्विक भोजन ग्रहण करें

अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप माना जाता है।

अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं और एक बालक (भैरव) को घर बुलाकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें हलवा, पूड़ी और काले चने का प्रसाद खिलाया जाता है और वस्त्र व दक्षिणा दी जाती है।


नवरात्रि के 9 दिन – 9 रंग

नवरात्रि के प्रत्येक दिन एक विशेष रंग का महत्व होता है। श्रद्धालु इन रंगों के अनुसार वस्त्र धारण कर देवी की पूजा करते हैं।

  • प्रतिपदा – पीला
  • द्वितीया – हरा
  • तृतीया – ग्रे
  • चतुर्थी – नारंगी
  • पंचमी – सफेद
  • षष्ठी – लाल
  • सप्तमी – नीला
  • अष्टमी – गुलाबी
  • नवमी – बैंगनी

इन रंगों को शुभता, सकारात्मक ऊर्जा और देवी कृपा का प्रतीक माना जाता है।


चैत्र नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है। यह पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की विजय, साहस, भक्ति और आत्मविश्वास का संदेश देता है।

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