January 15, 2026
दिल्ली

आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी चिकित्सकों के समान अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई

  • October 23, 2025
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नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण ! क्या आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) के चिकित्सक वेतनमान, सेवा शर्तों और सेवानिवृत्ति आयु में एमबीबीएस डॉक्टरों

मुख्य न्यायाधीश जे. बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की द्विसदस्यीय पीठ ने कहा कि इस विषय पर अलग-अलग न्यायिक निर्णय दिए जा चुके हैं, इसलिए इसे बड़ी पीठ के पास भेजा जा रहा है ताकि इस पर अधिकारिक और एकरूप फैसला हो सके।

एलोपैथी और आयुष के कार्यक्षेत्र में मूलभूत अंतर

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एमबीबीएस डॉक्टर, यानी एलोपैथी चिकित्सक, क्रिटिकल केयर, जीवन रक्षक उपायों, शल्य चिकित्सा (सर्जरी) और पोस्टमार्टम जांच जैसे कार्य करते हैं, जो आयुष चिकित्सकों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।

कोर्ट ने कहा —

“ये जिम्मेदारियां और कौशल एमबीबीएस डॉक्टरों को एक अलग वर्ग में रखती हैं। अतः सेवा शर्तों में भिन्नता स्वाभाविक और न्यायसंगत है।”

राजस्थान सरकार की दलील

यह मामला राजस्थान सरकार की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य ने एमबीबीएस और आयुष डॉक्टरों के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति आयु सार्वजनिक हित में निर्धारित की थी ताकि एलोपैथी डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सके।

पूर्व के निर्णयों का हवाला

कोर्ट ने अपने पूर्ववर्ती निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा —

“एलोपैथी अस्पतालों में मरीजों की संख्या स्वदेशी चिकित्सा पद्धति वाले संस्थानों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। आपातकालीन सेवाओं, ट्रॉमा प्रबंधन और आकस्मिक चिकित्सा जैसे मामलों में मुख्य भूमिका एमबीबीएस डॉक्टरों की ही होती है।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विषय पर अंतिम और एकरूप निर्णय आवश्यक है।
रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास प्रशासनिक स्तर पर भेजे, ताकि बड़ी पीठ गठित की जा सके।

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