अब अंतिम विदाई भी हरित और निःशुल्क
- January 17, 2026
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दिल्ली में इलेक्ट्रिक व CNG शवदाह गृहों में मुफ्त दाह-संस्कार, प्रदूषण घटाने की बड़ी पहल @नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण!राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनशीलता
दिल्ली में इलेक्ट्रिक व CNG शवदाह गृहों में मुफ्त दाह-संस्कार, प्रदूषण घटाने की बड़ी पहल @नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण!राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनशीलता
दिल्ली में इलेक्ट्रिक व CNG शवदाह गृहों में मुफ्त दाह-संस्कार, प्रदूषण घटाने की बड़ी पहल
@नई दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण!
राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनशीलता की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। नगर निगम ने इलेक्ट्रिक और CNG आधारित शवदाह गृहों में दाह-संस्कार की सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क करने का फैसला लिया है। इस निर्णय को अधिकारियों ने पर्यावरणीय सुधार और आम नागरिकों को आर्थिक राहत देने की दिशा में “मील का पत्थर” बताया है।
अधिकारियों के अनुसार, परंपरागत लकड़ी आधारित दाह-संस्कार न केवल महंगे हैं, बल्कि भारी मात्रा में धुआं और कार्बन उत्सर्जन भी करते हैं। मौजूदा समय में लकड़ी से दाह-संस्कार पर प्रति क्विंटल लगभग 700 रुपये खर्च होते हैं और औसतन तीन से चार क्विंटल लकड़ी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में कुल खर्च 2100 से 2800 रुपये तक पहुंच जाता है। इसके मुकाबले CNG शवदाह की लागत करीब 1500 रुपये और इलेक्ट्रिक शवदाह मात्र 500 रुपये पड़ता है, जिसे अब नगर निगम ने पूरी तरह माफ कर दिया है।
नगर निगम का मानना है कि शुल्क हटने से लोगों की मानसिक और आर्थिक बाधाएं खत्म होंगी और वे पारंपरिक तरीकों के बजाय स्वच्छ और आधुनिक विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। फिलहाल दिल्ली में दो इलेक्ट्रिक और आठ CNG आधारित शवदाह गृह संचालित किए जा रहे हैं, जबकि अन्य स्थानों पर भी इस सुविधा के विस्तार की योजना पर काम चल रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक और CNG शवदाह गृह लकड़ी जलाने की तुलना में कहीं अधिक स्वच्छ हैं। इनमें नियंत्रित दहन प्रणाली और उन्नत फिल्ट्रेशन तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिससे हवा में हानिकारक गैसों और कणों का उत्सर्जन काफी कम होता है। इससे न केवल प्रदूषण घटेगा, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि इस फैसले का प्रभाव विशेष रूप से उन दिनों में दिखेगा, जब राजधानी गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में होती है। साथ ही, जागरूकता अभियानों के जरिए लोगों को हरित दाह-संस्कार के लाभों से अवगत कराया जाएगा।

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण संकट के बीच यह पहल यह संदेश देती है कि जीवन के अंतिम संस्कार में भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाई जा सकती है। नगर निगम का यह फैसला न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मजबूत कदम है, बल्कि संवेदनशील और मानवीय प्रशासन का उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।